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खतरे में हैं हमारी फिन्न बया, केवल भारत में पाई जाती है

वेट ग्रास लैंड का टाइगर माने जाने वाली फिन्न बया या यलो बिबर के समाप्त होने का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। दुनिया भर में केवल भारत में पाई जाने वाली पीले रंग की यह खूबसूरत पक्षी वेस्ट यूपी के चार चुनिंदा प्राकृतिक आवासों में हस्तिनापुर भी शामिल है। आखिरी बार इसे छह साल पहले देखा गया था। पक्षी विज्ञानियों की मानें तो इन्डेजर्ड घोषित की जा चुकी पक्षी की संख्या पाच हजार से भी कम हो चुकी । जल्द ही इसे खोजने के लिए दोबारा नए सिरे से सर्वे शुरू किया जाएगा। पक्षी विज्ञानी इसे बचाने के लिए आम लोगों को जोड़ने की कवायद करने का प्लान बना रहे हैं।

फिन्न बया पर कई सालों से रिसर्च कर रहे मेरठ के अंतरराष्ट्रीय पक्षी विज्ञानी रजत भागर्व के मुताबिक पक्षी के प्राकृतिक आवास में आ रही गड़बड़ी और मानवीय छेड़छाड़ जैसी वजहों से इस शानदार पक्षी की संख्या कम होती जा रही है। वेट ग्रास लैंड की सबसे प्रमुख पक्षी माने जाने वाली फिन्न बया के लुप्त हो जाने से तराई धास के मैदानों के पारिस्थितिक तंत्र को गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि पक्षी के प्राकृतिक आवास में बढ़ रही मानवीय दखल, कौओं की तेजी से बढ़ती संख्या और हस्तिनापुर के वेट ग्रास लैंड में पानी के प्रदूषण की लगातार गंभीर होती स्थिति की वजह इस प्रजाती के लुप्त होने का खतरा दिखने लगा है। उन्होंने बताया कि यह पक्षी वेट ग्रास लैंड में लगे शेमल के पेड़ों की सबसे उपरी टहनियों पर अपना घोंसला बनाती है। हालांकि इलाके में शेमल के पेड़ों की कटाई तेजी से हुई है। साथ ही हर साल मानसूनी सिजन में घासों की कटाई कर दी जाती है। जिससे इसके भोजन और ब्रिडिंग की समस्या उत्पन्न होती जा रही है।

अंतराष्ट्रीय पक्षी विज्ञानी की मानें तो मेरठ के स्थानीय लोगों को इस दिशा में जागरूक कर इसे बचाने में अहम भूमिका निभाई जा सकती है। इसके लिए चार तारीख को मेरठ में बर्ड नेचर वॉक भी आयोजित किया जा रहा है। जिसमें पर्यावरण और पक्षी प्रेमी मेरठियों को पक्षी विज्ञान और बर्ड वाचिंग की पूरी ट्रेनिंग देकर इसे बचाने की मुहिम शुरू की जाएगी। उनकी मानें तो अगर मेरठ के आम लोग इस अभियान में मदद करें तो इसकी दोबारा खोज की जा सकती है।

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  • Web Title:खतरे में हैं हमारी फिन्न बया