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बीमारियों ने जकड़ा हुआ साइबर सिटीवासियों को

बीमारियां साइबर सिटी के लोगों को जकड़े हुए हैं। एक ओर शहर में स्वाइन फ्लू का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। जबकि डेंगू ने भी पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। उधर, मौसमी बीमारियां शहरवासियों का पीछा नहीं छोड़ रही हैं। सबसे अधिक डायरिया ने बच्चों सहित बडों की हालत पतली करके रखी हुई है। इन दिनों सरकारी अस्पताल में शिशु रोग ओपीडी रोजाना औसतन दो सौ के पार पहुंच रही है। इनमें 70 फीसदी बच्चे डायरिया, उल्टी-दस्त, वायरल से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं। जबकि मेडिसिन ओपीडी में भी वायरल, खांसी, डायरिया के मरीजों की तादाद अधिक आ रही है।

अक्टूबर माह की शुरूआत होने के बावजूद शहरवासियों को वायरल फीवर, डायरिया, उल्टी-दस्त से निजात नहीं मिल पा रही है। इन दिनों सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों में भी इन्हीं बीमारियों से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं। सामान्य अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. उमेश मेहता के अनुसार पिछले लंबे समय से ओपीडी में आने वाले बच्चों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही। करीबन दौ सौ बच्चे रोजाना इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें डायरिया पीड़ित बच्चों की संख्या सबसे अधिक है। उनके अनुसार दूषित पानी व खाद्य पदार्थों के सेवन से बच्चों को इससे छुटकारा नहीं मिल रहा है।

इसके अलावा ऐसे बच्चों की तादाद भी अधिक हैं जिन्हें अभिभावक स्वाइन फ्लू की जांच करवाने के लिए लेकर आ रहे हैं। वे कहते हैं कि बच्चे जलजनित व मच्छरजनित बीमारियों की चपेट में न आए इसके लिए अभिभावकों को उनके खान-पान व आसपास की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखनो चाहिए है। फिजिशियन डॉ. गुलशन अरोड़ा के अनुसार मेडिसिन ओपीडी में भी कुछ ऐसा ही हाल है। इस समय भी मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या अधिक है।

 

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