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चांद पर बसने के फायदे

भारतीय उपग्रह ‘चंद्रयादन’ में लगे एम-3 कैमरे (मून मिनरल मैपर) द्वारा इस बात के पक्के संकेत मिले हैं कि पानीदार है चंद्रमा। इस खबर के साथ यह उम्मीद भी जाग उठी है कि शायद चंद्रमा की सतह पर इंसान के लिए बस्ती बना कर रहना मुमकिन भी हो जाएगा। हालांकि चंद्रमा की हवा में जीवन के लिए जरूरी फ्री-ऑक्सीजन नहीं है, जो भी है वह खनिज में (ऑक्साइड) फार्म में है, और पानी भी ‘इसरो’ के अनुसार बहुत कम है- एक टन मिट्टी में केवल आधा लीटर पानी ही मिल सकेगा। एक विशेष वर्ग को सब से ज्यादा फायदा होगा। क्योंकि चांद का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी का 1/6 है, तो यदि किसी का वजन पृथ्वी पर 120 किलोग्राम है तो वह चांद पर घट कर केवल 20 केलोग्राम का तोल ही दिखाएगा। यानि भारी भरकम वजूद वाले अगर चांद पर गए तो उनकी तो चांदी ही चांदी हो जाएगी। कोई भी यह नहीं कहेगा- ‘वजन घटाओ।’
डॉ. आर. के. मल्होत्रा, नई दिल्ली

मिलावट :  विचारणीय प्रश्न
प्रश्न यह है कि हम कम बिक्री करके ज्यादा कमाना चाहते हैं अथवा ज्यादा बिक्री करके आटे में नमक के बराबर मुनाफा लेकर भी और ज्यादा कमाना चाहते हैं? पहली स्थिति निश्चितत: मिलावट, कम तौल आदि से बनती है, जो सामाजिक स्तर पर अप्रतिष्ठित, नीचता, हीनता, धोखा, विश्वासघात, छल-कपट, चोरी, बेईमानी तो है ही, भारतीय विचार और मान्यता के अनुसार ‘पाप’ भी है। दूसरी स्थिति बिना किसी तरह की मिलावट के शत-प्रतिशत शुद्ध माल और पूरी तौल आदि से बनती है, जो सामाजिक स्तर पर प्रतिष्ठा, नेकचलन, सच्च व्यवहार और ईमानदारी तो है ही, भारतीय विचार और मान्यता के अनुसार ‘पुण्य’ भी है। इसी संदर्भ में ग्राहक के मन  की बात ले तो वह दो पैसे ‘वाजिब’ ज्यादा देकर भी माल की शत प्रतिशत शुद्धता और पूरी तौल चाहता है।
सरमनलाल अग्रवाल ‘सरन’,  आगरा
 
परेशान, ऑपरेशन नाकाम
रिलायंस जीएसएम के प्रबंधकों का ध्यान कुछ मूलभूत बातों की ओर दिलाना चाहता हूं। जैसा कि सभी जानते हैं कि दिल्ली में रिलायंस जीएसएम की सेवा फरवरी के आस-पास शुरू हुई, किन्तु आज तक कंपनी अपनी कस्टमर केयर सेवा को दुरुस्त नहीं कर पाई है। या तो कस्टमर केयर नंबर लगता नहीं, और लगने पर भी बातचीत में ही कट जाता है। दूसरी समस्या कंपनी के नेटवर्क से भी है। एसटीडी के साथ-साथ लोकल कॉल में भी आवाज या तो साफ सुनाई नहीं देती या बीच में ही कट जाती है। इन समस्याओं से दिल्ली के सभी जीएसएम उपभोक्ता परेशान हैं। देश की दूसरी सबसे बड़ी नेटवर्क वाली कंपनी होने का दावा करने वाली कंपनी क्या इस दिशा में कुछ करेगी? यदि नहीं तो 31 दिसम्बर से शुरू होने वाली मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी सेवा का हम जैसे परेशान उपभोक्ताओं को बेसब्री से इंतजार है। मैं इस पत्र के माध्यम से ट्राई एवं डॉट का भी ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि वे कृपया कस्टमर केयर सेवा और नेटवर्क के मामले में अच्छी व्यवस्था की जांच के बाद ही किसी कंपनी को सेवा के लिए लाइसेंस प्रदान करे।
अमित कुमार केशरी, मजलिस पार्क, दिल्ली

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