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नरेगा का नाम बदलकर महात्मा गांधी के नाम पर

नरेगा का नाम बदलकर महात्मा गांधी के नाम पर

सरकार ने शुक्रवार को अपने महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (नरेगा) का नाम बदलकर महात्मा गांधी के नाम पर करने की घोषणा की।

पंचायती राज संस्थाओं के पचास वर्ष पूरे होने के मौके पर यहां विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री ने संप्रग सरकार के बहुचर्चित राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून का नाम बदलने की घोषणा करते हुए कहा कि नरेगा का नाम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून रखे जाने का फैसला मंत्रिमंडल ने किया है।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ग्राम स्वराज को बहुत अहमियत देते थे। नरेगा को उनके नाम पर रखा जाना उन्हें श्रद्धांजलि देने का हमारा छोटा सा प्रयास है। इस मौके पर संप्रग की अध्यक्ष सोनिया गांधी और केन्द्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री सीपी जोशी भी मौजूद थे।

देश की प्रगति के लिए पंचायती राज संस्थाओं की सक्रिय भूमिका की महत्ता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत बनाने के बारे में जो संवैधानिक प्रावधान किये गये थे उन प्रावधानों का सही तरीके से उपयोग नहीं हो पाया है। बहुत से राज्यों में इन संस्थाओं कि लिए आज भी कार्य, कोष और इन्हें संचालित करने वाले नहीं दिये गये हैं ।

सिंह ने कहा कि संविधान के 73वें संशोधन के जरिये यह प्रावधान किया गया है कि राज्यों की विधायिकायें पंचायती राज संस्थाओं को स्थानीय शासन की संस्थाओं के रूप में अधिकार देंगी और आर्थिक विकास एवं सामाजिक न्याय की योजनाएं बनाने के लिए उन्हें मजबूत करेंगी।

उन्होंने कहा लेकिन हमारे देश में अभी तक इन संवैधानिक प्रावधानों का सही तरीके से उपयोग नहीं हो पाया है। बहुत से राज्यों में अभी भी पंचायती राज संस्थाओं को फंक्शन फंड और फंकशनरीज ठीक से नहीं दिए गए हैं। इस व्यवस्था को बदलना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बात में कोई संदेह नहीं कि देश की प्रगति के लिए पंचायती राज संस्थाओं को सक्रिय भूमिका निभानी है। सरकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों को पारदर्शी और प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए आम आदमी की भागीदारी जरूरी है और यह भागीदारी पंचायती राज संस्थाएं ही सुनिश्चित कर सकती है।

उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को भी पंचायती राज संस्थाओं को ज्यादा प्रभावी बनाने में एक अहम भूमिका अदा करनी है। जिन केन्द्रीय योजनाओं के लिए लिए राज्यों को धनराशि दी जाती है उनको लागू करने में पंचायती राज संस्थाओं की हिस्सेदारी पर जोर दिया जाना चाहिए, क्योंकि इन योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने में इन संस्थाओं की अधिक भागीदारी बहुत जरूरी है।

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