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दो टूक (02 अक्तूबर, 2009)

अजीब विरोधाभास है! शुरू में जब स्वाइन फ्लू के छिटपुट मामले उभर रहे थे तो मीडिया ने आसमान सिर पर उठा लिया था! लेकिन आज जब रोज सैकड़ों नए केस दर्ज हो रहे हैं तो पत्ता तक नहीं खड़क रहा! वैज्ञानिक कह रहे हैं कि फ्लू का दूसरा दौर पहले के मुकाबले ज्यादा संगीन है। 

दिल्ली में ही पिछले दो दिन में सौ से ज्यादा नए मामले सामने आए हैं। देश भर में मरने वालों की संख्या 328 पहुंच गई है। कुल संक्रमित लोगों की तादाद 10 हजार पार जा चुकी है। फिर भी मीडिया, पब्लिक और सरकार सब बेफिक्र क्यों हो गए हैं? क्या आज फ्लू के खिलाफ जनजागरण की जरुरत पहले से ज्यादा नहीं? क्या हम और आप समुचित सावधानी बरत रहे हैं?

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  • Web Title:दो टूक (02 अक्तूबर, 2009)