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डीडीए में एक और घोटाला

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) में औद्योगिक प्लॉट आवंटन को लेकर एक नए घोटाले का खुलासा हुआ है। वैसे तो यह घोटाला 25 साल पहले हुआ था, लेकिन डीडीए के विजीलेंस विभाग की जांच में यह अब पकड़ में आया है। यह बात दीगर है कि शिकायतकर्ता पिछले डेढ़ साल से इसकी शिकायत करता रहा और जब उन्होंने सूचना का अधिकार कानून का सहारा ले लिया, तब जाकर डीडीए को यह कार्रवाई करनी पड़ी।

जानकारी के मुताबिक वर्ष 1983 में शाहदरा और वाल्ड सिटी चांदनी चौक के नॉन कंफर्मिग एरिया से हटाई गई फैक्ट्रियों को ओखला फेस वन में सस्ती दरों पर प्लॉट दिए गए थे। इनमें एक आवेदक कन्हैया लाल ने दो अलग-अलग कंपनियों के नाम से आवेदन किया और उसे दोनों प्लॉट मिल गए।

आवेदन करने वाली कंपनियों के नाम अलग तो थे, लेकिन इनके पार्टनर और उनका पता एक ही था, जबकि डीडीए की 1976 में बनी पॉलिसी के मुताबिक एक ही व्यक्ति या पार्टनर या सिस्टर कंसर्न को दो अलग-अलग प्लॉट नहीं दिए जा सकते हैं।

पिछले साल के मध्य में इस मामले की शिकायत डिफेंस कालोनी के सुनील मोहन ने डीडीए से की। लगातार शिकायतों के बाद कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने आरटीआई कानून का सहारा लिया तो अब उन्हें बताया गया कि डीडीए के विजीलेंस जांच के बाद पाया गया कि इसमें घोटाला किया गया है या आवेदनकर्ता ने झूठी जानकारी दी।

विजीलेंस विभाग ने आयुक्त (भूमि) से एक प्लॉट का आवेदन रद्द करने की सिफारिश की है, लेकिन इस मामले में कानूनी या विभागीय कार्रवाई करने से इंकार किया है।

करोड़ों में बिक चुका है प्लॉट

उद्यमी कन्हैया लाल द्वारा जो प्लॉट वर्ष 1983 में 90-90 हजार रुपये में खरीदे था। इनमें से एक प्लॉट यह उद्यमी लगभग दस साल पहले ही 22 करोड़ रुपये में बेच चुका है और यह प्लॉट आगे भी बिक चुका है।

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