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गांधी को जीवन में उतारने की जरूरत

मेरी नजर में महात्मा गांधी आज भी उतने ही प्रासंगिक है जितने कि उस दौर में, बल्कि आज के  दौर में तो हमें गांधी की ज्यादा आवश्यकता है। उस दौर में गांधी ने लड़ाई राजनीतिक और प्रशासनिक स्वतंत्रता के लिए लड़ी थी। गांधी जी श्रम को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं। आज श्रमनिष्ठ समाज बनाने की जरूरत है। ऐसा समाज जो अपने साधनों पर खुद काम करें। आज के दौर में सभी के लिए जरूरी है कि गांधी जी को याद करने के साथ जिएं भी। गांधी स्वावलंबन के द्वारा स्वराज्य लाना चाहते थे। आज हम एक दूसरे की मदद कर स्वावलंबन ला सकते हैं।

आज महात्मा गांधी जिन्दा होते तो दिल्ली में यमुना किनारे रहते और गरीबों को उजाड़कर अमीरों को बसाने के विरुद्ध सत्याग्रह करते। हम सबको मिलकर यमुना को यमुना मां बनाए रखने का आग्रहपूर्वक सत्कर्म करने हेतु जुटना चाहिए। यही यमुना सत्याग्रह यमुना और दिल्ली के गौरव को कायम रख सकता है। मैं भी इससे इत्तेफाक रखता हूं कि मानव सभ्यता नदियों के किनारे पली-बढ़ी है। नदियों और प्रकृति की गोद में रहकर ही हमने तरक्की की बातें कीं और फिर तरक्की हासिल की।

लेकिन यह सारा का सारा विकास हुआ प्रकृति के साथ रहकर, उसका सम्मान करके और उससे सामंजस्य बिठाकर। गांधी भी यही कहते थे। उनका मानना था कि ये सृष्टि सबकी जरूरत पूरा कर देगी, लेकिन किसी के लालच को पूरा नहीं कर सकती। ऐसे में मुझे अपना काम गांधी का काम लगता है। गांधी अगर जिंदा होते तो निजीकरण, व्यापारीकरण के खिलाफ आंदोलन करते। गांधी जी साधक थे। यह संभव है कि हमारे साधनों के तरीकों में बदलाव हो लेकिन हमारा लक्ष्य एक ही है।  गांधी की प्रासंगिकता हर दौर में रहेगी और आज तो उनकी काफी आवश्यकता है।

(राजेंद्र सिंह को राजस्थान में जल सरंक्षण के लिए मैग्सेसे पुरस्कार से नवाजा गया था।)

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