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हमेशा प्रासंगिक हैं गांधी बाबा के विचार

परिचयः चंडी प्रसाद भट्ट सार्वजनिक जीवन से पहले जीएमओ में थे। महात्मा गांधी की विचारधारा के पुरोधा विनोवा भावे और जयप्रकाश नारायण से इस कदर प्रभावित हुए कि जीवन की दिशा ही बदल गई। अछूतोद्धार आंदोलन, भूदान यज्ञ, समता का भाव, न्यूनतम आवश्यकताओं से जीवन यापन, अहिंसा और व्यक्ति के बजाय विचार को प्राथमिकता और उसी के लिए लगना अपना जीवन मंत्र बना दिया चंडी प्रसाद भट्ट ने।

आज भी जिस संस्था दशोली ग्राम स्वराज्य मंडल को उन्होंने गांधी विचार के लिए बनाया उसमें सुबह-सायं महात्मा गांधी की सर्वधर्म प्रार्थना गाई जाती है। जीवन भर खादी ही पहना, उसी को ओढ़ा और उसी को स्वीकार किया है। ब्राह्मण परिवार में जन्मने के बाद भी वे जाति बंधन से दूर रहे। आज भी बछेर में आश्रम में भोजन जो महिला बनाती है वह अनुसूचित जाति की है। उसी के द्वारा बनाये भोजन को विचार और जीवन को जोड़ने का माध्यम बताते हुए कहते हैं कि महात्मा गांधी कहते थे कि भगवान दीन-हीन की कुटिया का निवासी है।  

गांधी वाक्य सबसे बड़ा महामंत्र है और गांधी बाबा के विचार मेरे ही क्या पूरी दुनिया के लिए और हमेशा के लिए प्रासंगिक हैं। महात्मा गांधी का अहिंसा का विचार ही आज की दुनिया को बचा सकता है। आज की भौतिकवादी और वैज्ञानिक उपलब्धियों पर इतराने वाली दुनिया ने इतना प्राप्त कर लिया है कि अमीर और गरीब के बीच की खाई दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है पर महात्मा गांधी ने कहा था कि प्रकृति का कम से कम उपयोग और भौतिकवादी जरूरतों का कम से कम उपभोग का विचार ही सबकी दुनिया बना सकता है और वही दुनिया स्थिर रह सकती है।

आज दुनिया महात्मा गांधी के उसी विचार को यदि अपनाती है तो खुशहाली हर तरफ बिखरी दिख सकती है। गांधी के श्रम, अहिंसा और स्वावलंबन की विचारधारा से प्रभावित होकर पेड़ों को बचाने के लिए चिपको आंदोलन शुरू हुआ। जहां जंगलों को काटने पर आमादा क्रूर कुल्हाड़ी के आगे गांव के लोगों ने यह कहकर पेड़ों पर चिपकने का संकल्प लिया कि पेड़ों को कटने से पहले कुल्हाड़ी हमारी पीठ पर चले। गांधी के इस अहिंसात्मक विचार से प्रेरित चिपको आंदोलन ने पूरी दुनिया में अहिंसात्मक रूप से जो नया कार्य किया उसे पूरी दुनिया ने स्वीकारा।

महात्मा गांधी ने पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के लिए जो विचार दिया था उसी से प्रभावित होकर दशोली ग्राम स्वराज्य मंडल के माध्यम से जमीन को हरा-भरा करने के लिए दशोली ग्राम स्वराज्य मंडल ने विगत 25 वर्षो में 17051 वृक्ष लगाकर गांधी के विचारों का पल्लवन किया है। महात्मा गांधी कहते थे कि मुझे नहीं गांधी के विचार अर्थात चरखा जयंती मनानी चाहिए। यही विचार लोक जीवन में इतना गहरा असर डाल गया कि आज तक गांधी का विचार ही सबके लिये सबसे बड़ा महामंत्र है।

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