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गंगा महोत्सव के जरिए बचाएंगे डॉल्फिन

करीब बारह साल से जारी वैज्ञानिक अभियान और संरक्षण कार्यक्रम के बाद अब आम लोगों को साथ लेकर डॉल्फिन को बचाने की तैयारी की जा रही है। वेस्ट यूपी में गंगा डॉल्फिन बचाने के लिए जारी कवायद में विश्व वन्य जीव संगठन ने गंगा महोत्सव का आयोजन कर आम लोगों को जोड़ने की योजना बनाई है।

पांच अक्तूबर से सात अक्तूबर तक इस अभियान के तहत नरौरा से बिजनौर तक गंगा किनारे के इलाकों में सांस्कृतिक गतिविधियां, खेल कूद और प्रतियोगिताएं  आयोजित कर गंगा डॉल्फिन के महत्व के बारे में बताया जाएगा। कर्णवास स्थित डब्लूडब्लूएफ कैंप के डॉल्फिन प्रोजेक्ट मैनेजर विवेकशील सगर के मुताबिक मई में ही पहली बार कर्णवास में ही डॉल्फिन के चार नए बच्चाे देखे गए थे।

उन्होंने कहा कि बीते तीन सालों में डॉल्फिनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। डॉल्फिन की बढ़ती संख्या को देखते हुए कर्णवास, नरौरा, मखदूमपुर समेत गंगा किनारे गांवों में बसे इलाके में बड़ी संख्या में आम लोगों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए इलाके में किसानों, छात्रों और स्थानिय निवासियों को जोड़ा जा रहा है। बारह साल तक चले वैज्ञानिक संरक्षण अभियान के बाद अब आम लोगों को बड़े पैमाने से प्रोजेक्ट से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।

स्कूलों में लेख प्रतियोगिताएं ओर रैलियां आयोजित कर बच्चों को डॉल्फिन के बारे में बताया जा रहा है। साथ ही इस पर पड़ने वाले पर्यावरण प्रदूषण के खतरों से आगाह करने की कोशिश भी की जा रही है। वहीं वाइल्ड लाइफ वार्डेन महेश चंद्र ने कहा कि जलीय पारिस्थितिक तंत्र के लिए डॉल्फिन को बचाना बेहद जरुरी है। उन्होंने कहा कि डब्लू डब्लू एफ के साथ मिलकर विभाग इस ओर लगातार प्रयास कर रहा है।

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