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रोडवेज को आठ महीने में एक करोड़ 40 लाख का घाटा

हरियाणा रोडवेज को पिछले आठ महीने में एक करोड़ 40 लाख रुपये का घाटा लगा है। पिछले साल पहले आठ महीनों में यह घाटा मात्र 55 लाख रुपये का था। विभाग को अधिक घाटा पुरानी बसें से हो रहा है। रोडवेज बेड़े में काफी समय से डीजल की नई बसें नहीं जुड़ी हैं। पुरानी बसें किलोमीटर पूरे करने के बाद सड़कों पर दौड़ रही हैं। इन्हें लंबे रुट पर चलने से यह बार-बार खराब हो जाती हैं। इन्हें वर्कशॉप लाने के बाद घाटा और बढ़ जाता है।

बसें खराब होने की स्थिति में कई बार सवारियों को रास्ते में पैसे लौटाने पड़ते हैं। इसके चलते विभाग को पिछले आठ महीनों में पुरानी बसों से 18 लाख रुपये का घाटा हुआ है। विभाग के अधिकारी बताते हैं कि पिछले कई सालों से बेड़े में पुराने मॉडल डीजल की एक भी बस शामिल नहीं हुई है। लोफ्लोर व सीएनजी बसें लंबे रूट पर नहीं चल सकतीं। इसी कारण घाटा बढ़ रहा है। लगातार घाटा बढ़ने को लेकर महाप्रबंधक प्रदीप डागर का कहना है कि इस साल छठे वेतन आयोग के चलते वेतनमान में वृद्धि हुई है। पुराना छह महीनों का बकाया भी देना पड़ा। पुरानी बसें लगातार धोखा दे रही हैं। इस कारण घाटा दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है।

 

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