DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अब सादी नहीं रही अब खादी

अब सादी नहीं रही अब खादी

महात्मा गांधी द्वारा उठाया गया खादी के प्रचार-प्रसार का बीड़ा आज सब्यसाची, तरुण तहिलियानी, रितु कुमार, जतिन कोचर और मालिनी रमानी जैसे नामी डिजाइनरों के हाथों में है। विविध रंगों, आधुनिक कट्स और कंटेम्परेरी लुक के साथ दिनोंदिन पेश की जा रही खादी की नई कलेक्शंस देसी व विदेशी बाजार में जलवे बिखेर रही हैं। कॉलेज जाने वाले युवाओं से लेकर एलीट क्लास के लोग और एनआरआई इस फैब्रिक के मुरीद हैं।

आजादी के संघर्ष में नेताओं का ड्रेस कोड माने जाने वाली खादी अब एक लंबा रास्ता तय कर चुकी है। नामी डिजाइनरों के साथ दिनोंदिन खादी आधुनिक और कंटेम्परेरी लुक लेती जा रही है। खादी के परंपरागत अवतार में सुंदरता और स्टाइल पर अधिक जोर नहीं दिया गया, यहां तक कि कपड़े को डाई भी नहीं किया जाता था। पर सस्ते और रिंकल फ्री विदेशी कपड़ों से मिल रही प्रतिस्पर्धा में कभी मोटा और असमान माने जाने वाला खद्दर आज नए अर्थ और लोकप्रियता हासिल कर रहा है। खादी के आकर्षण को बढ़ावा देने के मद्देनजर कपड़े की डाई के लिए अच्छे ऑर्गेनिक रंगों के इस्तेमाल से लेकर मुलायम और एक समान फिनिशिंग पर ध्यान दिया जा रहा है। थ्रेड वर्क, कांथा, चिकन करी, दराज, आरी वर्क, मिरर वर्क के साथ खादी को आधुनिक स्टाइल और कट्स के साथ पेश किया जा रहा है।

खादी को जनसाधारण का परिधान बनाने वाले सबसे पहले डिजाइनर महात्मा गांधी बने तो आज यह कमान प्रणवी कपूर, रोहित बल, सब्यसाची, मालिनी रमानी, रितु कुमार, राघवेंद्र राठौर, तरुण तहिलियानी जैसे डिजाइनरों के हाथों में है। राहुल गांधी, सचिन पायलट, ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे युवा नेताओं के आधुनिक कट्स के बंद गले वाले खादी के कुरतों व जकेट्स ने इस फैब्रिक को नया उछाल दिया है। आज इसके खादी, अनोखी, फैब इंडिया, मार्ग, खादी लाइन आदि अनेक ब्रांड विभिन्न देसी और विदेशी बाजारों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। बाजार में उपलब्ध खादी परिधानों पर गौर करें तो एक हजार से ज्यादा रेडी टू वियर वेस्टर्न और इंडो-वेस्टर्न फ्यूजन स्टाइलिंग सभी अवसरों के लिए खादी परिधानों में उपलब्ध है।

देशभक्ति नहीं, बिजनेस भी

फिल्म ‘रावण’ में ऐश्वर्या के लिए, ‘गुजारिश’ में निर्देशक संजय लीला भंसाली के लिए और फिल्म ‘पा’ में विद्या बालन के लिए खादी आउटफिट तैयार करने वाले प्रसिद्ध डिजाइनर सब्यसाची के अनुसार, खादी विविधता भरा, आरामदायक और देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा फैब्रिक है। एक इंटरव्यू में वह कहते हैं, ‘मेरे लिए खादी से जुड़ना देशभक्ति का मुद्दा नहीं है। खादी कहीं अधिक मुनाफे वाली बिजनेस स्ट्रैटजी है। हाल में मेरी खादी ब्राइडल कलेक्शन को खरीदारों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला।’ कोलकाता बेस्ड डिजाइनर सौमित्र मोंडल की लिनेन सिल्क कलेक्शन को भी लक्मे फैशन वीक 2008 में अच्छी प्रतिक्रिया मिली। हस्तनिर्मित सिल्क के साथ लिनेन यार्न का उनका प्रयोग सबको पसंद आया। उनके अनुसार हल्के वजन की साफ खादी की बाजार में काफी मांग है। फिलहाल वह लिनेन सिल्क के लिए बड़े एपैरल स्टोर जैसे आदित्य बिड़ला ग्रुप द्वारा संवर्धित लिनेन क्लब और फैब इंडिया के साथ अपने काम को आगे बढ़ाने का विचार रखते हैं।

कूल, कंफर्टेबल और क्लासिक

खादी जितनी स्टाइलिश है, उतनी ही आरामदायक भी। कुछ लोगों को इसे पहनना अपनी परंपरा और पर्यावरण से जुड़ना है तो कुछ सभी अवसरों के अनुकूल आरामदायक गुण और क्लासिक लुक की तारीफ करते नहीं थकते। फैशन डिजाइनर लीना सिंह के अनुसार, यह कपड़ा पूरी तरह ईको-फ्रैंडली है। गर्मियों में ठंडा और सर्दियों में गरम एहसास इस कपड़े को भारतीय मौसम के अनुरूप और सदाबहार बनाता है। इस फैब्रिक की बुनाई इस प्रकार है कि धागों में उचित मात्रा में हवा का आवागमन बना रहता है। लीना के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में लिनेन की विस्तृत रेंज उपलब्ध है। खादी लिनेन की सबसे शुद्ध किस्म है। खादी के शौकीनों के लिए खादी अलग ही महत्‍व रखती है। अभिनेता डीनो मोरिया कहते हैं, ‘मुझे जींस पर खादी का शॉर्ट कुरता पहनना बेहद पसंद है। खादी के लंबे कुरतों को आप फॉरमल ईवेंट्स में भी पहन सकते हैं। मुझे खादी में खासतौर पर बेज, क्रीम और ऑलिव कलर पसंद हैं, पर और रंगों के साथ भी प्रभावी प्रयोग किए जा सकते हैं।’

महंगी है, पर..

माना जा रहा है कि समय के साथ खादी जन साधारण की पहुंच से दूर हो गई है, जिसका एक प्रमुख कारण इसकी महंगी कीमत और अधिक रख-रखाव की जरूरत है। हालांकि खादी आउटफिट्स के महंगे होने और इनकी कम लाइफ की बात से लीना सिंह इत्तेफाक नहीं रखतीं। वह कहती हैं कि विभिन्न अच्छे खादी भंडार और खादी ग्रामोद्योग केंद्रों पर उचित कीमतों में खादी के कपड़े उपलब्ध हैं। खादी केंद्रों पर बिकने वाली सिल्क और शिफॉन की कुरतियां, स्कर्ट्स, पैंट और ट्राउजर, रंग-बिरंगे खादी बैग, पुरुषों के लिए चूड़ीदार और कुरतों के बड़े खरीदार युवा हैं। कॉलेज गोअर्स में जींस के साथ खादी कुरतियां काफी लोकप्रिय हैं। लीवायज और डेनिम जसे ब्रांडों पर भी लोग जम कर खर्च करते हैं। पश्मीना शॉल या खादी के डिजाइनर आउटफिट कुछ महंगे जरूर हैं, पर राजसी शान-शौकत को तरजीह देते हैं। उनके लिए खादी से बेहतर विकल्प कोई नहीं है।

एक नहीं अनेक विकल्प

खादी आज कुछ खास रंगों और वरायटी तक सीमित नहीं है। कॉटन, सिल्क और वूल तीनों प्राकृतिक फाइबर्स में खादी की विविध रेंज उपलब्ध है, बल्कि हर प्रदेश की खादी अपने में खास टच लिए हुए है। खादी सिल्क की साड़ियों की ही बात करें तो पश्चिम बंगाल में रील्ड सिल्क, मुर्शीदाबाद सिल्क साड़ी, सिल्क पर बालूचरी और कांथा स्टिच, गुजरात में पटोला, बिहार में टस्सर और मटका, कर्नाटक में मैसूर सिल्क, मध्य प्रदेश में टस्सर और चंदेरी, तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश में कांजीवरम सिल्क, धरमवरम सिल्क, पोचमपल्ली टाई एंड डाई साड़ियां देखने को मिलेंगी। कॉलेज गर्ल्स के लिए खादी में कुरतियां हैं तो ट्यूनिक भी, पेंसिल स्कर्ट्स हैं तो रैप अराउंड भी।

खादी में आपके लिए

जाकेट, खादी शॉल, स्कर्ट्स, सलवार कमीज, स्पैगेटी टॉप, कुरती, पैंसिल स्कर्ट, रैप अराउंड, टॉप, चूड़ीदार और लॉन्ग कुरते, साड़ियां, ट्यूनिक।

ट्रैंड में

प्रिंटेड खादी, शीशा व धागा वर्क, सिल्क जकेट्स, मुसलिन व मटका खादी, खादी सिल्क विद ईकत वर्क, फुलकारी व नक्शी कांथा वर्क के साथ, खादी शॉल, प्रिटेंड सिल्क स्कार्फ, खादी सिल्क पर गोल्डन बॉडर, पश्मीना और अंगूरा शॉल।

वीकएंड खरीदारी 
- खादी ग्रामोद्योग, रीगल सिनेमा के पास, कनॉट प्लेस
-  अंबापाली बिहार इंपोरियम, खड़क सिंह मार्ग
-  दिल्ली हाट, आईएनए मार्केट के पीछे, नई दिल्ली
-  सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज इंपोरियम, जनपथ
-  इंडियन हैंडीक्राफ्ट इंपोरियम, महरौली रोड
-  सोमा, प्लाज के सामने, कनॉट प्लेस
-  लेपाक्षी आंध्र प्रदेश इंपोरियम, बाबा खड़क सिंह मार्ग, नई दिल्ली
-  खादी स्टोर, खान मार्किट
-  खादी ग्रामोद्योग, लाजपत नगर
- फैब इंडिया, कनॉट प्लेस
- खादी लाइन, सीपी

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:अब सादी नहीं रही अब खादी