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टीम इंडिया में हो आमूलचूल बदलावः शास्त्री

टीम इंडिया में हो आमूलचूल बदलावः शास्त्री

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और मशहूर टीवी कमेंटेटर रवि शास्त्री ने टीम इंडिया के चैंपियंस ट्राफी के पहले दौर में ही बाहर होने पर गहरी निराशा जताते हुए कहा है कि चयनकर्ताओं को वर्ष 2011 में होने वाले विश्वकप को ध्यान में रखते हुए ज्यादा से ज्यादा नए खिलाड़ियों को मौका देना चाहिए।

शास्त्री ने एक समाचार पत्र से खास बातचीत कहा है कि चैंपियंस ट्राफी में मौजूदा भारतीय टीम के लचर प्रदर्शन को देखते हुए अब युवा खिलाड़ियों को मौका देने का सही वक्त आ गया है। उन्होंने कहा कि डेढ़ साल बाद होने वाले वनडे विश्वकप को देखते हुए अभी से खिलाड़ी तैयार करने होंगे।

चैंपियंस ट्राफी में खिताब की प्रबल दावेदार मानी जा रही टीम इंडिया को अपने तीन प्रमुख खिलाड़ियों वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह और जहीर खान की गैर-मौजूदगी बहुत अखरी है और उसे टूर्नामेंट के पहले ही दौर में बाहर हो जाना पड़ा। इस दौरान खेले गए सभी तीन मैचों में भारतीय टीम का प्रदर्शन काफी फीका रहा।

शास्त्री ने कहा कि कृष्णामचारी श्रीकांत के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय चयन समिति को आगामी वनडे विश्वकप के बारे में अभी से सोचना शुरू कर देना चाहिए और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से अनुबंध प्राप्त 25 खिलाड़ियों को बारी-बारी से टीम का प्रतिनिधित्व करने का मौका देना चाहिए।

शास्त्री ने चयनकर्ताओं पर आरोप लगाया कि अपने एक वर्ष के कार्यकाल में नई चयन समिति ने मुंबई के अभिषेक नायर को छोड़कर किसी अन्य युवा खिलाड़ी को पर्याप्त मौका नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि श्रीकांत की अध्यक्षता वाली चयनसमिति दिलीप वेंगसरकर की अध्यक्षता वाली पूर्व चयनसमिति की रोटेशन प्रणाली को लागू करने में पूरी तरह विफल रही है जिसका प्रभाव खिलाड़ियों और टीम के प्रदर्शन पर पड़ा है।

पूर्व भारतीय कप्तान ने कहा कि भारतीय चयनकर्ताओं को तत्काल प्रभाव से रोटेशन प्रणाली को फिर से लागू कर देना चाहिए अन्यथा भारतीय क्रिकेट को भविष्य में कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने स्वीकार किया कि सीनियर खिलाड़ियों की भूमिका टीम में अहम है लेकिन इनकी कीमत पर रोटेशन प्रणाली को बंद नहीं करना चाहिए।

चैंपियंस ट्राफी में भारतीय टीम की नाकामी के बावजूद शास्त्री ने इस बात से इन्कार किया कि देश में प्रतिभावान खिलाड़ियों की कमी है। उन्होंने कहा कि अपनी खोई हुई लय प्राप्त करने तक चयनकर्ताओं को तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा को वनडे या ट्वंटी 20 मैचों में शामिल नहीं करना चाहिए और उन्हें सिर्फ टेस्ट मैचों में ही जगह दी जानी चाहिए।

प्रख्यात टीवी कमेंटेटर शास्त्री ने कहा कि ईशांत करियर की शुरुआत में 140 किलोमीटर प्रतिघंटे से भी अधिक की गति से गेंदबाजी करते थे लेकिन अब उनकी रफ्तार महज 128-130 किलोमीटर प्रतिघंटा रह गई है। यह
एक उभरते हुए गेंदबाज के लिए कहीं से भी शुभ संकेत नहीं है।

इसी तरह शास्त्री ने उत्तर प्रदेश के तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार को वनडे क्रिकेट में और मौका दिए जाने की वकालत भी की। उन्होंने कहा कि प्रवीण को और मौका दिए जाने से उनकी गेंदबाजी में निखार आ सकता है। वर्ष 1984 में बेंसन एंड हैसेज वर्ल्ड सीरीज में टीम इंडिया की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शास्त्री ने हालिया प्रदर्शन के आधार पर कुछ युवा खिलाड़ियों के नाम भी चयन समिति को सुझाए। उन्होंने कहा कि चयनकर्ताओं को बंगाल के विकेटकीपर रिद्धिमान साहा और इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में भारत के एकमात्र शतकवीर रायल चैलेंजर्स बेंगलुरू के मनीष पांडे को जल्द से जल्द टीम में मौका देना चाहिए।

शास्त्री ने कहा कि रिद्धिमान और मनीष में काफी प्रतिभा है और चयनकर्ताओं को इन दोनों ही खिलाड़ियों को भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका देना चाहिए। रिद्धिमान आईपीएल के दोनों संस्करणों में कोलकाता नाइटराइडर्स की असफलता के बावजूद व्यक्तिगत तौर पर बढ़िया प्रदर्शन किया है।

बहरहाल, बदलाव की इस सारी कवायद में भी शास्त्री सीनियर खिलाड़ियों की अहमियत बनाए रखने के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा कि टीम इंडिया को अब भी सीनियर खिलाड़ियों के अनुभव की जरुरत है लेकिन इन्हें रोटेशन के आधार पर टीम में रखा जाना चाहिए।

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