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मारवाड़ समारोह जोधपुर (राजस्थान)

मारवाड़ समारोह जोधपुर (राजस्थान)

थार रेगिस्तान के किनारे बसा जोधपुर राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है, जिसे राठौर राजपूत राज राव जोधा जी ने 15वीं शताब्दी में बसाया था। शहर की गिनती वभवशाली एवं राजसी गौरव के रूप में की जाती है।

शरद पूर्णिमा के अवसर पर मनाया जाने वाला मारवाड़ सांस्कृतिक समारोह मुख्यत: क्षेत्रीय लोक संगीत एवं लोकनृत्यों के नाम समर्पित है। यह समारोह एक ओर राजस्थान के शासकों की रंगीन जीवन शैली का परिचय देता है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय लोक संगीत एवं पारम्परिक लोक नृत्यों से भी रूबरू होने का मौका देता है।

दो दिनों तक चलने वाले इस समारोह में ‘ओसिया’ के सैंड ड्यून्स पर शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। समारोह में विदेशी सैलानी भी आनंद लेते हुए दिखाई देते हैं। लोक नर्तकों की टोली के साथ उन के पैर भी थिरकने लगते हैं।

इस समारोह को देखने आये सैलानी ऊंट की सवारी तो करते ही हैं, जोधपर के मुख्य पर्यटन स्थलों को भी देखना नहीं भूलते, जिसमें 125 मी. ऊंची पहाड़ी पर बना मेहरावगढ़ किला, उम्मेद भवन, जसवंत धड़ा के अलावा शहर से कुछ दूरी पर स्थित बालसमंद झील, मंडौर गार्डन तथा महामंदिर प्रमुख हैं।

यहां के संग्रहालयों में विभिन्न शैलियों के लघु चित्र, राजस्थानी संस्कृति की दुर्लभ पांडुलिपियां देखी जा सकती हैं। जोधपुर शहर वायु, सड़क एवं रेल मार्ग से देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।

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