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2 जून, 2020|11:37|IST

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पाक की शीर्ष अदालत ने अटकाई जरदारी की जान

पाक की शीर्ष अदालत ने अटकाई जरदारी की जान

पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ द्वारा राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और अन्य लोगों को भ्रष्टाचार के मामलों में आम माफी देने के लिए जारी किए गए अध्यादेश पर सवाल उठाए हैं।

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा है कि इस अध्यादेश पर संसद की मोहर लगना बेहद लाजिमी है, वरना इन लोगों के खिलाफ दर्ज मामले खुद-ब-खुद शुरू हो जाएंगे।

शीर्ष न्यायालय ने इस संबंध में 31 जुलाई को सुनाए गये अपने फैसले के बारे में बुधवार को विस्तृत आदेश दिया। इस फैसले में मुशर्रफ द्वारा वर्ष 2007 में लगाये गये आपातकाल को अवैध बताया गया था।

न्यायालय ने कहा है कि मुशर्रफ द्वारा जारी किये गये राष्ट्रीय सुलह समझौता अध्यादेश (एनआरओ) और अन्य सभी अध्यादेश की संसद द्वारा 120 दिनों के भीतर पुन: पुष्टि होनी चाहिए। प्रधान न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी ने 343 पृष्ठों में फैसला दिया है कि यदि संसद एनआरओ का अनुमोदन करने में नाकाम रहती है तो इसके तहत पांच फरवरी 2008 के बाद हटाये गये सभी भ्रष्टाचार और फौजदारी मामले अध्यादेश की समाप्ति की अवधि का दिन आते ही पूर्व प्रभाव से खुद ब खुद दोबारा खुल जायेंगे।

जरदारी और कई प्रमुख नेताओं सहित पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार के सभी मामले एनआरओ के तहत पांच फरवरी 2008 के बाद बंद हो गये थे।

गौरतलब है कि जरदारी को मार्च-अप्रैल 2008 के दौरान भ्रष्टाचार के कई मामलों में निर्दोष करार दिया गया। आंतरिक मामलों के मंत्री रहमान मलिक, रक्षा मंत्री चौधरी अहमद मुख्तार और ब्रिटेन में नियुक्त पाकिस्तानी दूत वाजिद शम्शुल हसन उन लोगों में शामिल हैं, जिन्हें अध्यादेश की अवधि खत्म होने के बाद एनआरओ से लाभ होगा।

शीर्ष न्यायालय ने 31 जुलाई को अपने संक्षिप्त फैसले में वर्ष 2007 के आपातकाल को अवैध करार दिया था। अब मुशर्रफ द्वारा जारी किये गये इस अध्यादेश को सरकार को नवंबर के अंत तक संसद का अनुमोदन दिलाना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 89 के तहत राष्ट्रपति द्वारा जारी किया गया कोई अध्यादेश यदि नेशनल असेंबली या संसद के दोनों सदनों में नहीं रखा जाता है तो यह अपने लागू होने की तिथि के चार माह के भीतर रद्द हो जायेगा।

इस फैसले के मुताबिक एनआरओ पांच फरवरी 2008 को अवैध हो गया, क्योंकि इसने 120 दिनों की अपनी संवैधानिक अवधि पूरी कर ली। गौरतलब है कि मुशर्रफ ने छह अक्तूबर 2007 को एनआरओ जारी किया था। इसका उद्देश्य पीपीपी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर भ्रष्टाचार के मामलों को बंद करना था। लेकिन इस अध्यादेश से पीएमएल (एन) जैसे अन्य दलों को फायदा नहीं हुआ।

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