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त्योहार सिखाते हैं बहुत कुछ

त्योहार सिखाते हैं बहुत कुछ

दोस्तो, तुमने अपने आसपास कुछ लोगों को कहते हुए सुना होगा कि क्या होते हैं त्योहार। कुछ भी तो नहीं, सिर्फ काम से एक दिन की छुट्टी भर। पर देखा जाए तो इन त्योहारों के बहाने हम जिंदगी जीने के अनेक फॉर्मूले सीख जाते हैं। तो तुम्हें यही पाठ पढ़ाने के लिए ये त्योहार हो गए हैं तैयार। वैसे तो त्योहारों का आना-जाना सालभर लगा रहता है, लेकिन इस समय एक के बाद एक त्योहार तुम्हें खुशियां देने के लिए तैयार हैं। धनतेरस, छोटी दीवाली, बड़ी दीवाली, भैया दूज, क्रिसमस और फिर नए वर्ष का स्वागत भी किसी त्योहार से कम नजर नहीं आता। 

पढ़ाई, स्कूल, ट्यूशन फिर दूसरी वोकेशनल क्लासेज। तुम्हारे पापा का ऑफिस, काम और सिर्फ काम। बस यूं ही बीत जाता है न एक साल। लेकिन इन दिनों मौसम कुछ बदला-बदला रहता है। अरे हम सर्दी-गर्मी-बरसात की बात नहीं कर रहे। हमारे कहने का अर्थ है कि हर कोई इन त्योहारों के लिए व्यस्त नजर आता है। तुम धूम धड़ाका करने में अपने दोस्तों से पीछे नहीं रहना चाहते हो। तुम सोच रहे होंगे कि इस बार किस त्योहार पर कौन से परिधान पहनें। या फिर मम्मी से कौन-कौन सी डिशेज की फरमाइश करें।
 
घर में सफाई के लिए रंग-रोगन और सजावट के हर सामान के लिए मम्मी-पापा व्यस्त रहते हैं। दादा जी तुम्हारा साथ देते हैं। सीधे-सीधे चल रही जिंदगी में अचानक इन त्योहारों से उमंग व नई ताजगी का अहसास होने लगता है। घर में हर एक के लिए तोहफों का आना सभी के लिए खुशियों भी बिखेरता दिखाई देता है। हम जीना भी सीखते हैं इन त्योहारों से।

हमारे जीवन में आई हर परेशानी या फिर कोई दुख इन दिनों कुछ पलों के लिए कहीं ओझल हो जाते हैं। रंगोली बनाना, घर की साज-सज्जा पर अधिक ध्यान, अगर कहीं किसी खूबसूरत कलश को सजे हुए देखा तो घर में किसी न किसी सदस्य का मन जरूर करेगा कि काश, हमारा घर भी ऐसा ही सजा हो। त्योहारों के मौके पर घर पर मेहमानों को आना-जाना भी तेज हो जाता है। यही कारण है कि घर का हर सदस्य अपने घर को सबसे खूबसूरत बनाना चाहता है। आजकल जब बाजार की ओर निकलते होंगे तो तुम देखते होंगे कि बाजार कितने सज-धज के तैयार हैं। मानो इस उत्सवी वातावरण के स्वागत के लिए तैयार बैठे हों। बाजारों की रौनक भी हमारे अंदर उत्साह का संचार करती है।

घर के सदस्य ही इन दिनों इंटीरियर डिजाइनर बन जाते हैं। क्रिएटिविटी के पंख लगा कर हम उड़ने लगते हैं। तुमने देखा ही होगा कि जब कोई हमारे घर की तारीफ कर दे तो कितना अच्छा लगता है। तुमने गौर किया होगा कि इन दिनों हर कोई आस्थामय हो जाता है। ईश्वर से अपने परिवार के लिए सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती मां अपनों के लिए सब कुछ मांग लेना चाहती है। जो पूरे वर्ष किसी धार्मिक स्थल या फिर घर पर ही बने मंदिर में जाने से बचते हैं, वे भी इन दिनों मस्तक नवाते हैं। एकाग्र होकर ध्यान लगाना हमें अपने जीवन में आने वाली कठिनाई के लिए मजबूत करता है। आने वाले दिनों में कुछ ऐसे त्योहार भी आएंगे, जो एक दूसरे के लिए त्याग की भावना को भी सामने लाएंगें। घर का हर कोई सदस्य एक दूसरे के लिए कुछ न करना चाहता है। या यूं कहें कि दूसरों के लिए जीना भी यही त्योहार सिखाते हैं।

इन दिनों कई लोग अपने बहीखातों की भी शुरुआत करते हैं। विश्वास यही होता है कि जो भी हम कार्य शुरू कर रहे हैं, वह शुभ हो। हम कह सकते हैं कि हमें आशावादी भी यही त्योहार बनाते हैं।

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