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इनके रास्तों पर चल कर तो देखो

इनके रास्तों पर चल कर तो देखो

दोस्तो, तुम जानते ही हो कि 2 अक्टूबर को पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मनाता है। आज हम इनके ऐसे प्रेरक प्रसंगों का जिक्र करेंगे, जिन्हें तुम भी अपने जीवन में अपनाने की कोशिश कर सकते हो।
 
जब गांधी जी हाईस्कूल में पढ़ते थे, तब उन्हें श्रवण और राजा हरिश्चन्द्र जैसे नाटक देखने को मिले। उनके बारे में कहा जाता है कि इन नाटकों का उन पर इतना गहरा असर हुआ कि उन्होंने ठान लिया कि वे कभी झूठ नहीं बोलेंगे और सेवा भाव में कभी पीछे नहीं हटेंगे। एक बार न जाने उन्हें बीड़ी पीने की आदत कैसे लग गई। कुछ समय बाद उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने अपनी इस बुरी आदत से हमेशा के लिए पीछा छुड़ा लिया। उन्होंने अपने पिता को पत्र लिखकर सारी बातें बात दीं और अपने लिए सजा मांगी। इसलिए अगर हम से भूलवश कोई गलती हो जाए तो बड़ों को बताने में कभी हिचकिचाना नहीं चाहिए।

अब बात करते हैं ‘जय जवान जय किसान’ का नारा देने वाले पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की। एक बार स्कूल के रास्ते में पड़ने वाले बगीचे में सभी दोस्त इकट्ठे हुए। रसीले आम देख उन्हें चुराने की योजना बनाई गई और पहरेदार बना दिए गए शास्त्री जी। चौकीदार ने शास्त्री जी को बहुत डांटा। पिटाई से बचने के लिए लाल ने कहा कि मुझे छोड़ दें, मेरे तो पिता भी नहीं हैं। चौकीदार ने उन्हें छोड़ तो दिया, लेकिन कहा कि तुम्हारा तो एक अच्छा इंसान बनना सबसे जरूरी है, क्योंकि तुम्हारे अच्छे कामों की वजह से तुम्हारे पिता का नाम भी जीवित होगा। उसके बाद वे एक अच्छा इंसान बनने के प्रयास करने लगे और बाद में भारत के प्रधानमंत्री बने।

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