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लोहारीनागपाला परियोजना के बंद से पांच अरब का घाटा

उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी जिले में पर्यावरण के नाम पर नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन (एनटीपीसी) की मेगा लोहारीनागपाला विद्युत परियोजना की बंदी तकरीबन पांच अरब रूपये का घाटा देगी।

एनटीपीसी द्वारा छह सौ मेगावाट की यह महत्वपूर्ण परियोजना जहां न केवल उत्तराखण्ड की बिजली समस्या का हल करेगी, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी यह बिजली की आपूर्ति करेगी। हाइड्रो सेक्टर में बनने वाली एनटीपीसी की चुनींदा और महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक लोहारीनागपाला परियोजना पर अब तक पांच अरब रूपये से भी अधिक खर्च हो चुके हैं लेकिन इसे पर्यावरण हानि के नाम पर रोक दिया गया था।

उत्तरकाशी सहित राज्य के अन्य हिस्सों के भी लोगों ने इस योजना को स्थगित किये जाने के खिलाफ अपनी आवाज मुखर करनी शुरू कर दी है।

पदमश्री पुरस्कार से नवाजे गये अवधेश कौशल ने तो इस परियोजना सहित अन्य स्थगित परियोजनाओं को चालू करने की मांग को लेकर अपना पदमश्री पुरस्कार भी लौटाने की घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा कि यदि एनटीपीसी की लोहारीनागपाला और राज्य सरकार की पाला मनेरी तथा भैंरों घाटी विद्युत परियोजनाओं को तुरंत नहीं शुरू किया गया तो पदमश्री लौटाना उनका आखिरी विकल्प होगा। इसके अलावा उनके पास कोई चारा नहीं रहेगा।

टिहरी संसदीय क्षेत्र के तहत उत्तरकाशी जिला पड़ता है जहां लोहारीनागपाला परियोजना की तमाम मशीनें धूल फांक रही हैं।

टिहरी के सांसद विजय बहुगुणा ने गत दिनों इस परियोजना को चालू करने की मांग करते हुए निकाली गई एक रैली को अपना समर्थन दिया था।

राज्य के चारधाम विकास परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष सूरतराम नौटियाल, गंगोत्री क्षेत्र के विधायक गोपाल सिंह रावत, उत्तरकाशी जिला पंचायत अध्यक्ष नारायणसिंह चौहान ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में लोहारीनागपाला परियोजना को तुरंत शुरू करने की मांग उठाई है।

नौटियाल ने जहां इस परियोजना को उत्तराखण्ड के विकास से जुड़ा मामला बताया और कहा कि इस परियोजना पर चालीस प्रतिशत से भी अधिक काम हो चुका है लेकिन अब इसे बंद कर दिया गया है।

उत्तरकाशी के मूल निवासी नौटियाल ने कहा कि यह उत्तरकाशी के लोगों के साथ सरासर अन्याय है। पर्यावरण संरक्षण के लिए बहुत सारे रास्तों को अपनाया जा सकता है लेकिन हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार देने वाली और हजारों हेक्टेयर जमीन की सिंचाई की व्यवस्था करने वाली इस परियोजना को तुरंत शुरू किया जाना चाहिये।

उत्तरकाशी की एक ग्राम पंचायत की प्रधान जमुना देवी ने कहा कि इस परियोजना के शुरू होने से पूरे उत्तरकाशी जिले का विकास होगा। उन्होंने रोष व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे पत्र में कहा कि इस परियोजना के बंद होने से सैकड़ों युवकों को रोजगार से वंचित किया जा रहा है।

उत्तरकाशी जिला पंचायत के अध्यक्ष नारायण सिंह चौहान ने उत्तरकाशी जिले की विकास परियोजनाओं में बाहरी लोगों द्वारा दखल दिये जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस परियोजना के निर्माण पर तकरीबन पांच अरब रूपए अब तक खर्च हो चुके हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में कहा कि यह परियोजना केन्द्र सरकार की उत्तराखण्ड के विकास के लिए एक दूरगामी परियोजना है। इस परियोजना में अब तक करीब पांच अरब रूपये खर्च हो चुके हैं तथा पच्चीस अरब रूपये के काम के लिए टेंडर भी जारी हो चुके हैं लेकिन इस परियोजना के स्थगित होने से न केवल जनता की गाढी कमाई के पांच अरब रूपये खर्च हो जायेंगे बल्कि इस राज्य का विकास भी अवरूद्ध होगा।

उत्तरकाशी जिले की भंगेली पटटी टकनौर ग्राम प्रधान संगीता चौहान ने कहा कि यह परियोजना उनके गांव से थोड़ी दूर पर स्थित है। इससे सैकडों लोगों को रोजी रोटी मिली हुई थी और परियोजना के पूरी होने के बाद भी अन्य  सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलने की संभावना थी लेकिन इस परियोजना का विरोध कर लोगों के पेट पर लात मारा गया है। संगीता ने भी प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में परियोजना को तुरंत चालू कराने की मांग की है।

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  • Web Title:लोहारीनागपाला परियोजना के बंद से पांच अरब का घाटा