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पूर्वोत्तर में लगातार कंपन विनाशकारी भूकंप की चेतावनीः विशेषज्ञ

पूर्वोत्तर में लगातार कंपन विनाशकारी भूकंप की चेतावनीः विशेषज्ञ

पूर्वोत्तर क्षेत्र में एक माह के दौरान हुए मध्यम से अधिक तीव्रता वाले करीब छह कंपनों को भूगर्भविज्ञानी इस क्षेत्र में विनाशकारी भूकंप की पूर्व चेतावनी मान रहे हैं।

प्रख्यात भूगर्भ विज्ञानी एसके सरमा ने बताया कि भूकंप की प्रकृति को लेकर किए गए अध्ययन से संकेत मिलता है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के कुछ हिस्सों में दबाव बन रहा है। पूर्वोत्तर क्षेत्र में भूगर्भीय हलचल की प्रवृत्ति पर लगातार अनुसंधान कर चुके सरमा ने बताया कि इस क्षेत्र में अधिक तीव्रता का भूकंप आने की आशंका है।

अगस्त से सितंबर माह के दौरान इस क्षेत्र में भूकंप के विभिन्न तीव्रता वाले छह झटके आए। पहला झटका 11 अगस्त को आया, जिसकी रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 4.8 थी। अगले ही दिन 5.6 तीव्रता का झटका आया।

इसके बाद 19 अगस्त को 4.9 तीव्रता का भूकंप का झटका आया, फिर 31 अगस्त को पूर्वोत्तर की धरती 5.3 तीव्रता के झटके से कांपी। 21 सितंबर को 6.3 तीव्रता वाले झटके के अगले दिन यहां रिक्टर पैमाने पर 5.7 तीव्रता का झटका आया।

सरमा स्पष्ट करते हैं कि क्षेत्र में अलग-अलग समय पर अलग-अलग तीव्रता के झटके आए। कम तीव्रता के झटकों की संख्या बढ़ रही है, जबकि अधिक तीव्रता के झटकों की संख्या कम हो रही है। 

सरमा ने बताया कि क्षेत्र में उच्च तीव्रता के भूकंप आने की अवधि और पूर्व में ऐसी घटनाओं तथा तथ्यों का आकलन करने पर संकेत मिलता है कि अगले कुछ वर्षों में कभी भी पूर्वोत्तर में उच्च तीव्रता का भूकंप का झटका आने की आशंका है।

बहरहाल, विशेषज्ञ एक स्वर में कहते हैं कि ऐसा भूकंप कब आएगा, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। भूगर्भविज्ञानी डीके बर्मन ने बताया भूकंप का पूर्वानुमान कोई भी, कभी भी, किसी भी देश में नहीं लगा सकता।

यह एक वैज्ञानिक सत्य है। भूगर्भविज्ञानी सूक्ष्म भूगर्भीय हलचलों, उनकी प्रकृति, आवृत्ति, बदलाव और अन्य अध्ययनों के आधार पर अधिक तीव्रता का भूकंप आने की आशंका जता सकते हैं।

पूर्वोत्तर भारत भूगर्भीय दृष्टि से दुनिया के छह सर्वाधिक संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है। अन्य पांच क्षेत्र मैक्सिको, ताइवान, कैलिफोर्निया, जापान और तुर्की हैं। पूर्वोत्तर भारत जोन पांच में आता है जो भारत के भूगर्भीय नक्शे का सर्वोच्च जोन माना जाता है। यह जिस स्थान पर है वहां उत्तर की ओर हिमालयी वृत्तांश और पूर्व की ओर बर्मीज वृत्तांश मिलते हैं।

भूगर्भीय हलचल की दृष्टि से इस क्षेत्र की संवेदनशीलता का कारण उत्तर में भारतीय टेक्टॉनिक प्लेट और यूरेशियाई टेक्टॉनिक प्लेट में टकराव है।

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