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भाजपा को चाहिए जीत दिलाने वाले

भारतीय जनता पार्टी गठबंधन के तहत राष्ट्रीय लोकदल को सात सीटें देने के बाद करीब एक दर्जन सीटों पर अपने मजबूत प्रत्याशियों की बाट जोह रही है। पार्टी को कल्याण सिंह के खिलाफ एटा में किसी सशक्त प्रत्याशी की तलाश है। इसी तरह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ रायबरेली में और राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी में कोई मजबूत प्रत्याशी नहीं मिल पा रहा है। रायबरेली और अमेठी से जुड़े सुलतानपुर और इलाहाबाद की सीटों पर भी यही समस्या है।समझौते के तहत रालोद के लिए मुजफ्फरनगर, नगीना, अमरोहा, बागपत, हाथरस और मथुरा की सीटें छोड़ी गईं हैं। सातवीं सीट बिजनौर या सम्भल में से कोई एक दी जाएगी। जनता दल यू भी तीन सीटों के लिए दबाव बनाए हुए है।ड्ढr पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सहारनपुर, मेरठ, अलीगढ़, एटा और बदायूँ सीट पर भी अभी प्रत्याशी घोषित होने हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटों पर चौथे दौर में 7 मई और पांचवे दौर में 13 मई को मतदान होगा। इसलिए इन पर प्रत्याशियों की घोषणा में विलंब हो रहा है। जेटली प्रकरण ने भी बाधा पैदा की। अब अगले दो-तीन दिन में केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में घोषणा हो जाने के आसार हैं। पूर्वाचल की सलेमपुर और जौनपुर सीटें अभी लटकी हुईं हैं। जनता दल यू सलेमपुर सीट पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के भतीजे रवि शंकर सिंह के लिए और मेरठ सीट के.सी. त्यागी के लिए भाजपा पर दबाव बनाए हुए हैं। फिलहाल भाजपा राज्य की 80 सीटों में से अब तक 61 सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। पिछले चुनाव में भाजपा ने 77 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। तीन सीटें सहयोगी जनता दल यू के लिए छोड़ीं थीं। तब रालोद का भाजपा से चुनावी समझौता नही था। रालोद ने सपा से समझौता कर 10 प्रत्याशी मैदान में उतारे थे जिनमें से केवल तीन ही जीत पाए थे। तीन प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे थे।ं

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