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‘मैं त्रिभुवन सिंह हूं..मुझे गिरफ्तार कर लीजिए’

सुबह करीब 11 बजे का वक्त। बाइस साल से फरार यूपी पुलिस का सबसे बड़ा इनामी माफिया त्रिभुवन सिंह बुलेटप्रूफ पजेरो (एसटीएफ के मुताबिक स्कार्पियो) से विज्ञानपुरी स्थित एसटीएफ दफ्तर पहुँचता है। गेट पर उससे पूछताछ होती है तो वह रािस्टर में अपनी एन्ट्री सही नाम से दर्ज करता है और फिर एसटीएफ के एसएसपी अमिताभ यश से मिल उन्हें बताता है कि वह सरंडर करना चाहता है। ब्रजेश सिंह गिरोह के खास सदस्य और पाँच लाख के इनामी त्रिभुवन ने यह दुस्साहस किया उस यूपी पुलिस के सामने जो आमना-सामना होने पर पाँच हाार के इनामी बदमाशों को भी मार गिराने से नहीं हिचकती।ड्ढr ड्ढr यह पुलिस का दावा है जो प्रेस कान्फ्रेंस में एसएसपी एसटीएफ और खुद त्रिभुवन सिंह ने संवाददाताओं को बताया। हकीकत कुछ और बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक यह आम चुनाव में माफियाओं की चुनावी जंग को खूनी न बनने देने की कवायद है। कुछ पुलिस अफसरों, विधायकों और राजनीतिज्ञों ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई और एसटीएफ का काम आसान हो गया। वैसे एसटीएफ का दावा है कि वह त्रिभुवन के काफी करीब पहुँच चुकी थी। खुद त्रिभुवन ने बताया कि उसे भी यह पता चल चुका था कि एसटीएफ उसके काफी करीब है। पुलिस उसके बच्चों के स्कूल व ससुराल तक पहुँचने लगी थी। लिहाजा उसने एसटीएफ के सामने सरंडर कर दिया। कोर्ट के सामने क्यों नहीं गया, इस सवाल पर त्रिभुवन ने कहा कि कोर्ट भी तो बाद में पुलिस के ही हवाले करती। लिहाजा वह सीधे एसटीएफ के पास आ गया।

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