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चुनावी नतीजों पर किसने क्या कहा

लोकसभा चुनाव के नतीजों ने जहां कांग्रेस खेमे में उत्साह और उास का संचार कर दिया है वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सहित वामपंथी दलों के नेतृत्व वाले कथित तीसरे मोर्चे की हवा गुम कर दी है। चुनावी परिदृश्य साफ होने के बाद कांग्रेस ने इसे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की नीतियों की जीत बताया और कहा कि कांग्रेस ही जनता की सही पसंद है वहीं भाजपा और वामपंथी दलों ने सहृदयता से हार स्वीकार की। चुनावी नतीजों पर किसने क्या कहा इस पर एक नजर:- प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह :-लोगों ने कांग्रेस पार्टी पर अपना विश्वास व्यक्त किया है। यह संप्रग की जीत है। लोगों ने एक बार फिर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व पर भरोसा जताया है। धर्मनिरपेक्ष और स्थायी सरकार बनाना हमारी प्रतिबद्धता है। मैं सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं कि वे पुराने मतोदों को भुलाकर एक धर्मनिरपेक्ष सरकार के गठन में अपना योगदान दें। हमें एक राष्ट्र के रूप में एकजुट रहना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी:-देश की जनता को मालूम है कि उनके लिए क्या अच्छा है। जनता ने हमेशा सही पसंद को चुना है। पार्टी को भारी सफलता दिलाने के लिए देश की जनता को मैं बधाई देती हूं। मनमोहन सिंह ही नई सरकार में प्रधानमंत्री होंगे। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी:-उत्तर प्रदेश की जनता ने धर्म और जातीयता की राजनीति करने वालों को पूरी तरह नकार दिया है। लोगों ने विकास के नाम पर मतदान किया है। कांग्रेस पिछले तीन वर्षो में विकास करने में ही लगी हुई थी। टीम वर्क बहुत महत्वपूर्ण है। जीत का श्रेय उत्तर प्रदेश की जनता को जाता है। जनता गंदी राजनीति से ऊब चुकी थी। वह बदलाव चाहती थी। हमारी चुनौती तो अब शुरू होती है। चुनावों में एक जीतता है तो दूसरा हारता भी है। हमारे विरोधियों ने मजबूती से चुनाव लड़ा। आडवाणीजी ने खुद बहुत मेहनत की। चुनावी नतीजे स्पष्ट करते हैं कि देश की जनता एकता चाहती है। वह साफ सुथरी और ईमानदार राजनीति के हक में है। भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह:-पार्टी के इतने खराब प्रदर्शन कीउम्मीद नहीं थी। हमारा प्रदर्शन बेहद खराब रहा। हमने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की जिस सफलता की उम्मीद की थी, वैसा हो नहीं सका। इसके कारणों पर बाद में चर्चा की जाएगी। माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव प्रकाश करात:- माकपा और वामदलों को इस चुनाव में भारी झटका लगा है। पार्टी के खराब प्रदर्शन की गंभीरता से समीक्षा करने की जरूरत है। पोलित ब्यूरो दो पारंपरिक गढ़ों पश्चिम बंगाल और केरल में पार्टी के कमजोर होने के कारणों की समीक्षा करेगी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव ए.बी.बर्धन:- हमेशा की तरह वह विपक्ष में बैठेंगे और गरीब लोगों के हितों के लिए लड़ते रहेंगे। कांग्रेस विजयी हुई है और वह इस समय सरकार बनाने की स्थिति में है। उनको हमारे समर्थन की क्या आवश्यकता है? अपने पूरे जीवन में हम विपक्ष में रहे और हम विपक्ष में ही रहेंगे। रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव :- कांग्रेस से सीट बंटवारे को लेकर तालमेल नहीं करना सबसे बड़ी राजनीतिक भूल थी। परिणामों से मैं खुश हूं। संतोष इस बात का है कि जनता ने भाजपा को नकार दिया। लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के साथ हमारे गठबंधन को भी बिहार की जनता ने नकार दिया। हार की हम समीक्षा करेंगे। विकास के नाम पर लोगों ने मतदान नहीं किया। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती:-प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) ने मिलीभगत करके मुसलमान समाज को गुमराह किया, जिससे बसपा को मुस्लिम वोट नहीं मिला। बसपा को हराने मंे भाजपा ने भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। बसपा वोट प्रतिशत में कांग्रेस और भाजपा के बाद सबसे बड़ी राष्ट्रीय पार्टी बनकर उभरी है। बसपा को इस बार देशभर में 6.22 फीसदी वोट मिला है। अरुण जेटली:- पार्टी की रणनीति में कोई न कोई कमी जरूर रह गई जिस वजह से हमारे पक्ष में नतीजे नहीं आए। जनता का फैसला हमें मंजूर है। हम इस पर विचार करेंगे कि नतीजे हमारे उम्मीदों के मुताबिक क्यों नहीं रहे। लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान:-राजनीति में हार-जीत लगी रहती है। जनता ने विकास के लिए मतदान किया। हाजीपुर से हमारी हार नहीं हुई है। यहां की जनता आपसे कभी यह नहीं कहेगी कि यहां विकास कार्य नहीं हुए हैं। कांग्रेस के साथ गठबंधन तोड़ने का कारण हमारी हार हुई इस बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी:- मैं उन्हें सलाह तो नहीं दे सकता क्योंकि मैं पार्टी का सदस्य नहीं हूं लेकिन यदि उनकी अंतरात्मा उन्हें इजाजत देती है तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। करात के खराब नेतृत्व के चलते ही पश्चिम बंगाल में पार्टी का इतना बुरा हाल हुआ। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.करुणानिधि:-डीएमके-कांग्रेस गठबंधन की लोकसभा चुनाव में जीत एक उचित फसल की तरह है। एक मेहनती किसान की तरह हमने तमिलनाडु में अच्छे बीज बोए और हमें उसके एवज में अच्छी फसल काटने को मिली। तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू :-चुनाव परिणाम उम्मीदों से काफी नीचे है और पार्टी चुनाव परिणाम के बारे में जिलावार विoफ्ेषण करेगी। आल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) की अध्यक्ष जे.जयललिता:-तमिलनाडु में डीएमके-कांग्रेस गठबंधन की जीत लोकतंत्र की हत्या है। इस जीत को हासिल करने के लिए पैसे व ताकत का इस्तेमाल किया गया। शिवगंगा से गृहमंत्री पी.चिदंबरम की जीत को शर्मनाक है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई. एस. राजशेखर रेड्डी:-कांग्रेस को राज्य में मिली सफलता जनता की विजय है। कांग्रेस पार्टी विजेता बनकर उभरी है क्योंकि जनता के बीच पार्टी की पूरी विश्वसनीयता है। हमने पिछले पांच वर्षो में केंद्र और राज्य में जो काम किया है उसमें लोगों ने अपना भरोसा जताया है। झारखंड मुक्ित मोर्चा (झामुमो) प्रमुख शिबू सोरेन:- राज्य में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) बेहतर प्रदर्शन करने में नाकाम रहा है। सूबे में व्याप्त ‘राजनीतिक संकट’ की वजह से ऐसा हुआ। राजनीति में ऊंच-नीच आता जाता रहता है।ं

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