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फिर फंसे जरदारी, मुशर्रफ पर बयान से सियासी भूचाल

फिर फंसे जरदारी, मुशर्रफ पर बयान से सियासी भूचाल

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को एक ओर जहां परवेज मुशर्रफ के बारे में की गई अपनी टिप्पणी के लिए विपक्ष की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, वहीं उनकी सत्तारूढ़ पार्टी ने भी उनकी बात को नकार दिया।

सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी [पीपीपी] ने इस बात से इनकार किया है कि पूर्व सैन्य शासक को बचाने के लिए कोई समझौता हुआ था। पीपीपी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रपति के प्रवक्ता फरहातुल्ला बाबर ने मीडिया में आई खबरों का खंडन किया। मीडिया ने कहा था कि जरदारी ने पुष्टि की है कि मुशर्रफ को माफी और सुरक्षित रास्ता देने के लिए अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के साथ एक समझौता हुआ था। मुशर्रफ ने पिछले साल अगस्त में राष्ट्रपति पद छोड़ दिया था।

खबरों में कहा गया था कि जरदारी ने सोमवार को अपने द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टी में पत्रकारों को बताया कि इस्तीफे के बाद मुशर्रफ को इसलिए सुरक्षित निकास दिया गया, क्योंकि इस बारे में अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय नेताओं के साथ एक समझौता हुआ था। बाबर ने कहा कि पत्रकारों के साथ बातचीत में मुशर्रफ को माफी और सुरक्षित रास्ता देने के लिए तथाकथित अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय शक्तियों के साथ समक्षौते का कोई जिक्र नहीं हुआ।

उधर पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी और मुख्य विपक्षी दल पीएमएल [एन] ने मांग की है कि जरदारी को अंतरराष्ट्रीय शक्तियों द्वारा कराए गए समझौते से संसद और लोगों को अवगत कराना चाहिए। संसद में नेता विपक्ष और पीएमएल [एन] के वरिष्ठ नेता चौधरी निसार अली खान ने कहा कि जरदारी की टिप्पणियां राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन है।


खान ने कहा कि यह देश की संप्रभुता, स्वतंत्रता और आत्मसम्मान का गंभीर उल्लंघन है जब एक निर्वाचित राष्ट्रपति यह कह रहा है कि पाकिस्तान में सरकार में बदलाव उन अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के जरिए आया जिनकी क्षेत्र में रूचि है। पीएमएल ने कहा कि वह नेशनल असेंबली में प्रस्ताव लाकर समझौते के ब्यौरे का खुलासा करने के लिए सरकार को विवश करेगी।

इस आलोचना के बाद बाबर ने एक बयान जारी किया जिसमें यह कहा गया कि जरदारी ने पत्रकारों से यह कहा था कि देश के राजनेताओं और दलों ने मुशर्रफ को कार्यालय से बाहर करने तथा राष्ट्रपति पद फिर से लोकतांत्रिक बलों के हवाले किए जाने के बारे में आपस में चर्चा की थी। उन्होंने कहा कि मुशर्रफ को बर्खास्त करने के लिए राजजनीतिक दलों के बीच वार्ता के बारे में जरदारी द्वारा की गई टिप्पणी को दुर्भाग्य से तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया और इसकी गलत व्याख्या की गई।

बाबर ने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच इस वार्ता के परिणामस्वरूप राष्ट्रीय और प्रांतीय असेंबलियों ने मुशर्रफ को हटाने सबंधी प्रस्तावों को स्वीकार किया। बाबर ने कहा कि यह बातचीत का ही नतीजा था कि राजनीतिक दलों ने पद न छोड़े जाने की स्थिति में मुशर्रफ पर महाभियोग चलाने के लिए एक समग्र आरोप पत्र तैयार करने के लिए आपस में हाथ मिलाया।

लोगों तथा संविधान के खिलाफ किए गए अपराधों के लिए मुशर्रफ को दंडित करने के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में बाबर ने कहा कि प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी पहले ही कह चुके हैं कि इस मामले में संसद को फैसला करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में होने वाली हर खराब चीज के लिए राष्ट्रपति को जिम्मेदार बताकर उनकी छवि को खराब करने का प्रयास किया जा रहा है।

बाबर ने संवाददाताओं से कहा कि यह कहा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है कि जरदारी समक्षौते के तहत राष्ट्रपति बने। पीपीपी नेता ने कहा कि राष्ट्रपति को संविधान के अनुरूप लोकतांत्रिक ढंग से चुना जाता है और 18 फरवरी 2008 को हुए चुनाव में पाकिस्तान के लोगों की इच्छा झलकी जिसने पीपीपी को बहुमत वाली पार्टी बना दिया। पाकिस्तान में यह एक आम सोच है कि मुशर्रफ ने अमेरिका, ब्रिटेन और सऊदी शाह परिवार की मध्यस्थता वाले समझौते के तहत राष्ट्रपति पद दोड़ा।

मुशर्रफ ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा था कि उन्हें सऊदी शाह अब्दुल्ला बिन अब्दुल अजीज से आश्वासन मिला था कि पीएमएल एन प्रमुख नवाज शरीफ 2007 में आपातकाल लगाने के लिए उन पर देशद्रोह का मुकदमा चलाए जाने के लिए जोर नहीं डालेंगे।

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