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आग भड़काने वाली चीड़ की पत्तियां अब सवांरेंगी तकदीर

उत्तरांखड के जंगलांे में आग भड़काने वाली चीड़ की पत्तियों सें अब लोगांे की तकदीर संवंरंेगी। इन पत्तियों से तेल निकालने और ईंट आदि बनाने की कई परियोजनाएं प्रदेश में अगले माह से शुरू होने वाली हैं। 23 से अधिक कम्पनियों ने इसके लिए रुचि व्यक्त की है। इनमें से चारपांच के साथ जल्दी ही समझौता होने की उम्म्ीाद है। वन विभाग के अधिकारी एआर सिन्हा ने बताया कि प्रदेश के जंगल हर साल करीब दस लाख टन चीड़ की सूखी पत्तियों से भर जाते हैं। स्थानीय लोग अब तक इसे जलने वाली लकड़ी और पशुआंे के लिए नरम बिछौना, पिल्टू के रूप में ही जानते हैं, जबकि वन विभाग हर साल इसके कारण जंगलों में लगने वाली आग से परेशान रहता है। लेकिन उद्यमियों की नजर में चीड़ की पत्तियां सोना हैं। इनसे निकलने वाला तेल बाजार मे बहुत मंहगा मिलता है, इसके अलावा इससे ईंटंे और अन्य निर्माण सामग्री तैयार की जाती है। सिन्हा ने बताया कि अभी ब्राजील चीन और अन्य देश चीड़ की पत्तियों से तेल और पल्प ईटंे आदि बना रहे हैं। इससे निकलने वाले टरपेन्टाइन तेल का अभी हमारे यहां आयात ही हेाता है छह हजार फीट की ऊंचाई पर मिलने वाली चीड की पत्तियों की गुणवत्ता ब्राजील के पेडों के समान ही पाई गई है। उन्होने बताया कि अब इन पत्तियांे केा गांव वालांे के सहयोग से एकत्र करवाया जाएगा।इसके लिए उन्हंे पैसे दिए जाएगे और इससे बनने वाले तेल आदि से सरकार को रायल्टी भी मिलेगी।

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