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बालकृष्णन ने माना, न्यायालयों में भ्रष्टाचार व्याप्त

बालकृष्णन ने माना, न्यायालयों में भ्रष्टाचार व्याप्त

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन ने शनिवार को कहा कि अपराधियों के छूट जाने के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार अभियोजन एजेंसियां होती हैं।

न्यायमूर्ति बालकृष्णन ने कहा कि मजबूत अभियोजन और सटीक गवाही के अभाव में अपराधियों के रिहा होने से उस मुकदमे का निस्तारण करने वाले न्यायाधीश को भी हताशा होती है, लेकिन कानून से उनके हाथ बंधे होते हैं। वह भ्रष्टाचार से जुडे अपराधों के खिलाफ लड़ाई को लेकर सीबीआई की ओर से आयोजित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधियों को सजा सुनिश्चित कराने के लिए देश में सशक्त एवं प्रभावी अभियोजन एजेंसियों की आवश्यकता है। उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपियों के खिलाफ अभियोग साबित करने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक प्रणालियों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया।

मुख्य न्यायाधीश ने ऐसे मुकदमों की सुनवाई में होने वाली देरी के लिए बहुसंख्य गवाहों को भी जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अभियोग सिद्ध करने के लिए ऐसे वैज्ञानिक तौर तरीके अपनाने चाहिएं, जिससे ज्यादा गवाहों की आवश्यकता न हो।

उन्होंने कहा कि देश में भ्रष्टाचार से जुडे़ मामलों के अंबार को कम करने के लिए जल्दी ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की 71 नई अदालतें गठित की जाएंगी। ये अदालतें भ्रष्टाचार के मामलों से यथाशीघ्र निपटने के लिए सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी। उन्होंने कहा कि सीबीआई के समक्ष भ्रष्टाचार के नौ हजार मामले पहले से लंबित हैं और नित्य नए मामले इसमें जुड़ते जा रहे हैं, जिसकी वजह से ऐसे मुकदमों का अंबार लगता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बाहुबली और धनपशु तरह-तरह के हथकंडों से मामलों को लंबे समय तक उलझाए रखते हैं, जिसकी वजह से ऐसे मुकदमों के निष्पादन की दर बहुत ही धीमी है। उन्होंने बताया कि अधीनस्थ अदालतों में आमतौर पर प्रतिमाह अधिकतम दस मुकदमों का अंतिम निष्पादन होता है, जबकि सीबीआई अदालतों में यह आंकड़ा महज तीन से चार मुकदमे का है। उल्लेखनीय है कि मुख्य न्यायाधीश ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से ऐसी नई अदालतों के गठन की मंजूरी देने का आग्रह किया था।

बालकृष्णन ने भ्रष्टाचार के मामले में दोषी सरकारी अधिकारियों की अवैध संपत्ति को जब्त करने के लिए वैधानिक प्रावधान किए जाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वह इस बात को सुनिश्चित करने के लिए वकीलों की विशेष टीम भी चाहते हैं ताकि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में अभियोग चलाने में उनकी विशेषज्ञता का विकास हो।

बालकृष्णन ने कहा कि अगर जनता की कीमत पर सरकारी अधिकारी अकूत संपत्ति जमा करते हैं तो इस तरह की संपत्ति को जब्त करने के मामले में राज्य सही है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि एक प्रमुख सुझाव है वैधानिक उपचार को शामिल करने का ताकि यह उन लोगों की संपत्ति जब्त करने में सक्षम बना सके जो भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम (पीसीए) के तहत अपराध के दोषी ठहराए जा चुके हैं।

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