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आईपीएल पर राजनीतिक दांव पेच

आईपीएल क्रिकेट मैचों पर अब राजनीति हावी होने लगी है। बाजार की ताकतें क्रिकेट प्रेमी राजनीतिकों की मदद से मैचों के आयोजन के लिए सुरक्षा तंत्र पर दबाव बनाने में जुट गई है। महाराष्ट्र में शुक्रवार का घटनाक्रम इसका उदाहरण है। कहने को तो राजनीतिक चुनाव में व्यस्त हैं लेकिन शरद पवार, अरुण जेटली तथा राजीव शुक्ला जैसे राजनीतिक मैच आयोजन में जुटे हैं। इससे पुलिस महकमों और सरकार के बीच ही टकराव के हालात पैदा होने लगे हैं। इसकी बानगी देखिए। महराष्ट्र पुलिस के डीजी (चुनाव) सुप्रकाश चक्रवती ने दोपहर को कहा कि महाराष्ट्र में 30 अप्रैल से पहले यानी मतदान के सभी चरण पूर होने तक आईपीएल मैचों का आयोजन सुरक्षा कारणों से संभव नहीं होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि मैचों 30 अप्रैल के बाद हों। इससे तूफान मच गया है। शाम होते-होते क्रिकेट लॉबी का राज्य सरकार पर ऐसा दबाव बना कि मुंबई पुलिस के कमिश्नर हसन गफूर से बयान जारी कराया गया है कि मुंबई पुलिस को मैच कराने में कोई आपत्ति नहीं है। वह बिना केंद्र की मदद के चुनाव के साथ-साथ मैच कराने में सक्षम है। बताया जाता है कि एनसीपी नेता शरद पवार के हस्तक्षेप से यह संभव हुआ। महाराष्ट्र में उद्घाटन और समापन समेत कुल 15 मैच होने हैं जिनमें से मैच 30 अप्रैल से पहले होंगे। क्रिकेट मैचों के आयोजन को लेकर राज्य के पुलिस महकमे भारी दबाव में हैं। रॉं के इस इनपुट की बड़े नेताओं की सभाओं पर आतंकी हमले हो सकते हैं। उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं लेकिन मैचों के लिए क्रिकेट लॉबी का दबाव कायम है। स्थिति यह है कि कोलकाता क्रिकेट एसोसिएशन के जगमोहन डालमिया शुक्रवार को दावा कर रहे हैं कोलकात्ता पुलिस को मैचों के आयोजन में कोई आपत्ति नहीं हैं। वहां अप्रैल में 7 मैच होने हैं। गृह मंत्रालय को अभी तक आंध्र प्रदेश और कर्नाटक ने अपनी टिप्पणी भेजी है। इसमें आंध्र प्रदेश ने भी मैचों के चुनाव पूर्व मैचों के आयोजन में असमर्थता जताई है। जबकि कर्नाटक सहमत है। गृह मंत्री पी. चिदंबरम और आला अफसरों के दिल्ली से बाहर होने के कारण हालांकि शुक्रवार को इस दिशा में ज्यादा प्रगति नहीं हो पाई है लेकिन गुजरात ने भी मैचों के शिड्यूल में बदलाव का सुझाव दिया है। तमिलनाडु में मैच चुनाव के बाद पड़ रहे हैं, उसने सहमति प्रकट की है। हिप्र, पंजाब, चंडीगढ़ तथा पश्चिम बंगाल के जवाब का गृह मंत्रालय इंतजार कर रहा है। इस बार में सोमवार तक फैसला होने की उम्मीद है। इस बीच कांग्रेस ने कहा है कि वह क्रिकेट के खेल के विरुद्ध नहीं हैं लेकिन अप्रैल-मई में होने वाले आम चुनाव को देखते हुए इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) टूर्नामेंट का आयोजन इसके बाद कराया जा सकता है। कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि पार्टी क्रिकेट तथा आईपीएल के आयोजन के विरुद्ध नहीं है लेकिन इस टूर्नामेंट को आयोजित करते समय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। खास कर ऐसे समय में जबकि देश में आम चुनाव होने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिऐ सुरक्षा एक अहम मसला है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार यह कहना सही नहीं है कि कांग्रेस शासित राज्य आईपीएल के आयोजन के विरुद्ध हैं और इसके आयोजन में अड़ंगा डाल रहे हैं। श्री तिवारी ने कहा ‘‘हम क्रिकेट के विरुद्ध नहीं हैं। हमारे कई युवा सांसद अपने चुनाव क्षेत्रों में क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन करते हैं।

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