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जब विधवाओं ने किया साज-श्रंगार

शुक्रवार का दिन बिहार की तारीख में यादगार बन गया। समूह में जुटी राज्य की 225 विधवाओं ने परंपरागत रूढ़ियों को ठोकर मारते हुए किया श्रंगार। चूड़ियां पहनीं। बिंदी लगायी। नेल पालिश की। वे तो मेंहदी व आल्ता भी लगाने वाली थीं लेकिन रूढ़ियों को तोड़ने के लिए महज संकेत में ही अपने इरादे उन्होंने जताए। दो दर्जन से अधिक ने तो पुनर्विवाह की भी इच्छा जतायी। इनमें बिहार की 20झारंखंड और राजस्थान की 8-8 महिलाएं शामिल थीं। पहली बार एकल (विधवा) महिलाओं ने कुरीतियों के खिलाफ समूह में लड़ने का ऐलान किया।ड्ढr ड्ढr इनमें से अधिसंख्य 25 से 40 वर्ष के बीच की थीं और वर्षो से समाज व परिवार की उपेक्षा झेल रही हैं। एक सुर से सबने कहा कि हम ऐसा माहौल बनाने के लिए संघर्ष करंगे जिससे सम्मान व अधिकार के साथ जी सकें। पुनपुन से आयी 18 साल की एक महिला ने कहा सफेद कपड़ों में वह कब तक जी सकेगी। वह अपने जीने का अधिकार चाहती है। अख्तरी बेगम ने कहा कि समाज व परिवार में ऐसा माहौल बनाया जाए जिससे ऐसी महिलाएं पुनर्विवाह कर सकें। परंपरागत रूढ़ियां टूटें। संवैधानिक व सरकारी योजनाओं का इन्हें लाभ मिले। देश में विधवा महिलाओं की संख्या जहां आठ फीसदी है वहीं विधुर पुरुष मात्र 2.5 फीसदी हैं। 67 फीसदी विधवाएं ससुराल में रहतीं हैं। झारखंड में ऐसी कई महिलाओं की दूसरी शादी करायी गयी।ड्ढr ड्ढr अब बिहार की जिन महिलाओं ने दूसरी शादी की इच्छा जाहिर की हैं, उनके लिए सामाजिक व पारिवारिक माहौल बनाया जाएगा। एकल नारी संघर्ष समिति की राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. जिन्नी श्रीवास्तव की उपस्थिति में अख्तरी बेगम को बिहार का अध्यक्ष बनाया गया। अपने हक व अधिकारों के लिए तीन दिनों से राज्य के 1जिलों के 3प्रखंड समेत झारखंड और राजस्थान की सवा दो सौ विधवा व तलाकशुदा एकल महिलाओं का समागम हुआ था। डा. जिन्नी श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसी महिलाओं के लिए सरकार और समाज दोनों को आगे आना होगा।ं

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