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संरक्षणवाद पर भारत को ब्रिक का साथ

संरक्षणवाद पर भारत को ब्रिक का साथ

रूस, चीन और ब्राजील ने संरक्षणवाद कि खिलाफ भारत के रुख पर सहमति जताई है। भारत का मानना है कि संरक्षणवाद वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा है और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को कुछ विकसित देशों की इस तरह की नीति से खुद को बचाने की जरूरत है।

ब्रिक देशों (ब्राजील, रूस, भारत और चीन) के वित्त मंत्रियों की शुक्रवार शाम हुई दो घ्‍ांटे की बैठक के बाद जारी एक संयुक्त वक्तव्य में कहा गया है, संरक्षणवाद आज वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष संरक्षणवाद से हर हालत में बचा जाना चाहिए।

बाद में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं को कई विकसित देशों के संरक्षणवाद को व्यापार से आगे वित्तीय बाजार तथा निवेश पर लागू करने के रुख से खुद का बचाव करना चाहिए।

वक्तव्य में यह भी कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार स्थिर और संतुलित वैश्विक अर्थव्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है।

वक्तव्य के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) तथा विश्व बैंक के समक्ष सबसे बड़ी समस्या प्रशासन की है, जिससे उनकी विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है। इन वैश्विक संगठनों के साथ कोटा, शेयर और मताधिकार के भेदभावपूर्ण वितरण की समस्या है।

वक्तव्य में कहा गया है कि कोटा और हिस्सेदारी में उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का हिस्सा बढ़ाने की जरूरत है।

वक्तव्य में कहा गया है कि हम आईएमएफ में सात प्रतिशत तथा विश्व बैंक समूह में छह फीसद अधिकार के हस्तांतरण करने के लक्ष्य का प्रस्ताव करते हैं। इससे विकासशील और विकसित देशों में मताधिकार का सही बंटवारा हो सकेगा। इसके अनुसार, इससे आईएमएफ और विश्व बैंक में उभरते बाजारों तथा विकासशील देशों का वोटिंग अधिकार वैश्विक जीडीपी में उनके योगदान के अनुपात में हो सकेगा।

मुखर्जी ने इस बात पर जोर दिया कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं वर्तमान वैश्विक वित्तीय संकट का कारण नहीं हैं, क्योंकि उनके वित्तीय तंत्र का नियमन परंपरागत रूप से मजबूत है। उन्होंने कहा कि इन देशों की विकास संभावनाओं को कभी गहरा झटका नहीं लगा था। ब्रिक देश वैश्विक अर्थव्यवस्था को सुधार पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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