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शहरी वोटरों के लिए माया नहीं हैं मेमसाब

ाब अमेरिका में बराक ओबामा राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रहे थे, उस समय हमार देश में एक नारा उछाला जा रहा था, ‘मायावती हमारी ओबामा है’। लेकिन जिस समय भारत का बड़बोला वर्ग यह नारा लगा रहा था उसी समय वह मायावती को प्रधानमंत्री बनने के विचार का भी विरोध कर रहा था। एचटी-सीफोर द्वारा 622 लोगों के बीच कराए गए सर्वेक्षण में यह उभरकर आया है कि 73 फीसदी लोग मायावती को प्रधानमंत्री बनाने के पक्ष में नहीं हैं। 48 फीसदी का मानना है कि मायावती ने राजनीति में बढ़ने के लिए जातिवाद फैलाया। 27 फीसदी उन्हें भ्रष्ट बता रहे हैं तो 25 फीसदी को लगता है कि प्रधानमंत्री बनने पर वह भारत को उत्तर प्रदेश तक सिमटा देंगी। 16 फीसदी उन्हें राजनीतिक रूप से सही नहीं मानते। 72 फीसदी प्रतिभागी मानते हैं कि वह अपनी विदेश नीति से देश की छवि को बट्टा लगा देंगी। प्रतिभागियों के इस समूह में 78 फीसदी 18-25 वर्ष आयुवर्ग के हैं।

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  • Web Title: शहरी वोटरों के लिए माया नहीं हैं मेमसाब