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लीची के निर्यात पर लगेगा ग्रहण

मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध शाही लीची के उत्पादन व निर्यात को बढ़ावा देने की तमाम कोशिश के बावजूद इस वर्ष भी इसके निर्यात पर ग्रहण लगे रहने की आशंका है। इसका कारण यह है कि जानकारी के अभाव में किसान लीची के फल पर जविक के बदले रासायनिक कीटनाशी का छिड़काव कर रहे हैं। इससे शाही लीची के निर्यात के मापदंड पर खड़ा उतरने पर प्रश्नचिन्ह लगा हुआ है। गौरतलब है कि लीची के उत्पादन व निर्यात को बढ़ाने देने के लिए केन्द्र सरकार ने दो वर्ष पूर्व मुजफ्फरपुर को ‘लीची निर्यात जोन’ घोषित कर किसानों को तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए मुशहरी में लीची अनुसंधान केन्द्र की स्थापना की। इसके अलावा उद्यान विभाग की लीची उत्पादक किसानों को लीची का पेड़ लगाने, लीची निर्यात करने व प्रोसेसिंग प्लांट लगाने पर अनुदान देने की योजना है। वहीं राज्य बागवानी मिशन ने निर्यात योग्य लीची उत्पादन के लिए जविक खेती की विशेष योजना बना रखी है। इसके तहत जिले के कांटी व मोतीपुर प्रखंड के एक हाार हेक्टेयर में शाही लीची के जविक उत्पादन के लिए दो करोड़ की योजना स्वीकृत है। मिशन निदेशक अरविन्दर सिंह ने दोनों प्रखंडों में जविक खेती कराने की जिम्मेवारी नेफेड को दी है। लेकिन, जिले में इस वर्ष अबतक जविक लीची के उत्पादन का प्रयास तक शुरू नहीं हुआ है। संस्था के प्रोजेक्ट अधिकारी श्याम कुमार ने बताया कि क्षेत्र का सव्रेक्षण कर किसानों का कलस्टर बनाया जा रहा है। जिला उद्यान अधिकारी बैद्यनाथ राक के अनुसार लीची की जविक खेती को बढ़ाव देने के लिए अगले सप्ताह पटना में विशेष बैठक होगी। इधर, अन्य वर्षो की तुलना में 40 प्रतिशत कम मंजर आने से इस वर्ष 70 की जगह 40 हाार टन लीची का ही उत्पादन होने का अनुमान है।ं

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