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हारपून में बदलाव से प्रसार का खतरा: नौसेना प्रमुख

हारपून में बदलाव से प्रसार का खतरा: नौसेना प्रमुख

पाकिस्तान पर हारपून मिसाइलों में गैर कानूनी तरीके से बदलाव करने के अमेरिका के आरोपों के बीच नौसेना प्रमुख एडमिरल सुरीश मेहता ने सोमवार को कहा कि नई दिल्ली कई मौकों पर प्रसार के खतरों की ओर इंगित करता रहा है। अपने उत्तराधिकारी एडमिरल निर्मल वर्मा को यहां कार्यभार सौंपने के तुरंत बाद एडमिरल मेहता ने कहा कि यह प्रसार के खतरे को दिखाता है और हम समय समय पर यह कहते रहे हैं।

मेहता ने कहा कि इसका (पाकिस्तान की) आत्मरक्षा से कोई लेना देना नहीं है और यह भारतीय हितों के खिलाफ है। उन्होंने हालांकि कहा कि हारपून में बहुत ज्यादा फेरबदल नहीं किया जा सकता है और पाकिस्तान को जमीनी लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए मिसाइल में बदलाव करने के लिए कुछ समय की दरकार होगी।

भारत रूस ब्रहमोस मिसाइल संयुक्त उपक्रम का जिक्र करते हुए मेहता ने कहा कि इसका विकास पहले जमीनी हमले के लिए क्रूज मिसाइल के तौर पर किया गया और अब इसे पोत आधारित हथियार के रूप में बदला जा रहा है।

हारपून में बदलाव के बारे में पाकिस्तान के खिलाफ अमेरिका के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर एडमिरल वर्मा ने कहा कि नौसेना का दायित्व यह सुनिश्चित करने का होगा कि कोई भारत पर हमला करने की जद में नहीं आये और ऐसी मिसाइलें दागे। उन्होंने कहा कि सामुद्रिक अभियान के दौरान हमारा दायित्व यह सुनिश्चित करने का है कि कोई भी व्यक्ति (हमला करने की) दूरी के दायरे  न आये और ऐसी मिसाइलें दागे।

हारपून में बदलाव किये जाने से भारत की चिंता के बारे में एडमिरल वर्मा ने कहा की हमें अपने सशस्त्र बलों में विश्वास होना चाहिए। वे सुसज्जित, प्रशिक्षित हैं और किसी खतरे का मुकाबला करने का उनमें कौशल है। नौसेना की सामुद्रिक क्षमता परिदृश्य योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा,  खतरे रहेंगे। हमें उनका ध्यान रखना है और उनका मुकाबला करना है।

सैन्य बल के मामले में चीन का मुकाबला करने में भारत के सक्षम नहीं होने संबंधी एडमिरल मेहता की टिप्पणियों के बारे में वर्मा ने कहा कि दोनों देशों के बलों के स्तर को देखने का एक तरीका है। हालांकि उन्होंने कहा कि मेहता ने पहले ही अपनी टिप्पणियों पर सफाई दे दी है।

उन्होंने कहा कि हमें अपनी क्षमता को देखना चाहिए। जो भी हो हमें खतरों का मुकाबला करना है और हमारे सामुद्रिक हितों का ध्यान रखना है। हमें खतरों का मुकाबला करने में सक्षम होना पड़ेगा। हिन्द महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी का जिक्र करते हुए नये नौसेना प्रमुख ने कहा कि हर देश को अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में अपना हित साधने का अधिकार है।

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