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बीमारी के बावजूद नाचे ,कथक गुरू

अपनी नृत्य क्षमता के कारण जीते जी किवदंती बन चुके वयोवृद्ध कथक गुरू पद्म विभूषण बिरजू महाराज ने बीमार होने के बावजूद  देश की प्रमुख औद्योगिक नगरी जमशेदपुर में अपने नृत्य से मनमोहक शमां बांधा कि लोग झूमने लगे।

टाटा प्रेक्षागृह में आयोजित (कथक यात्रा) कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए अपनी टीम के साथ पहुंचे 71 वर्षीय बिरजू महाराज ने तबीयत की खराबी को दरकिनार करते हुए ऐसा सधा हुआ नृत्य पेश किया कि लोगों ने दांतो तले उंगली दबा ली। बाद में उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राजाओं,महाराजाओं के जमाने से शुरू हुए कथक की लोकप्रियता में आज भी कोई कमी नहीं आई है। नई पीढी भी इसे विकसित करने का पूरा माद्दा रखती है।

लखनऊ घराने के इस विख्यात नर्तक ने कहा कि वह आधुनिक नृत्य को कथक का प्रतिद्वंद्वी नहीं मानते। तमाम चुनौतियों के बावजूद कथक आगे भी अपनी पहचान बनाए रखेगा।  वर्ष 1938 में एक नर्तक घराने में जन्मे बिरजू महाराज का वास्तविक नाम बृजमोहन मिश्र है। जबरदस्त नृत्य कौशल के धनी इस कथक गुरू को कई राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।

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