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पूर्वी गंडक नहर के जीर्णोद्धार पर 448 करोड़

जर्जर हो चुकी पूर्वी गंडक नहर प्रणालियों को दुरुस्त किया जाएगा। केन्द्र की मंजूरी के बाद बिहार ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। इस वर्ष खरीफ सिंचाई के बाद नवम्बर में इसके जीर्णोद्धार का काम शुरु होगा और दो वर्षो में काम पूरा हो जाएगा। सितम्बर 2011 के पहले इसे चालू कर दिया जाएगा और उस वर्ष इसका उपयोग खरीफ सिंचाई के लिए होगा। राष्ट्रीय सम विकास योजना के तहत मंजूर करते हुए केन्द्र ने 50 करोड़ रुपया आवंटित भी कर दिया है। योजना आयोग इस पर पहले ही अपनी सहमति दे चुका है। पूरी परियोजना पर 448 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

पूर्वी गंडक नहर से उत्तर बिहार के साढ़े तीन लाख हेक्टेयर भू-भाग में सिंचाई होती है। इस नहर प्रणाली को पूर्वी व पश्चिमी चम्पारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिले की लाइफ लाइन भी कहा जाता है। इन जिलों में सिंचाई का सबसे बड़ा स्नोत यही नहर प्रणाली है। पिछले लंबे समय से इसकी स्थिति बदतर हो गई है। हालांकि इसके जीर्णोद्धार का काम वर्ष 2003-04 में ही शुरू होना था। उस समय इस परियोजना के लिए 294 करोड़ रुपए की मंजूरी मिली थी।

जल संसाधन विभाग ने जीर्णोद्धार के लिए तैयार विस्तृत कार्ययोजना पर काम प्रारंभ कर दिया है। इस योजना के तहत तिरहुत नहर, घोड़सहन नहर, सुगौली शाखा नहर, जमुनिया शाखा नहर और इन नहरों से सम्बद्ध उपनहरों  का भी जीर्णोद्धार होना है। पूर्वी गंडक नहर प्रणाली के तहत 241 किलोमीटर तिरहुत मुख्य नहर और 5540 किलोमीटर लंबी उसकी वितरणियां सम्मिलित हैं। इस कार्य की जिम्मेवारी हैदराबाद की एक बड़ी कंपनी को सौंपी गई है और पिछले दिनों योजना के कार्यान्वयन को लेकर उससे एमओयू भी हो चुका है।

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