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विधायक पति ने जमकर इस्तेमाल किए, चोरी के एनएससी

ग्यारह वर्ष पूर्व पटना जंक्शन के यार्ड में खड़ी पार्सल वैगन से चोरी गए 80 करोड़ के नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (एनएससी) और किसान विकास पत्र (केवीपी) सहित दो सौ करोड़ रुपये की पोस्टल सामग्री के मामले की छानबीन में कई सनसनीखेज रहस्योद्घाटन हो रहे हैं। चोरी के एनएससी का उपयोग जहां राज्य के कई बड़े ठेकेदारों ने किया, वहीं एक जदयू की एक महिला विधायक के ठेकेदार पति का नाम भी चोरी के माल का सबसे ज्यादा उपयोग करने वालों में शुमार है।

विधायक के पति ने अकेले ही 22 लाख 70 हजार रुपये के एनएससी -केवीपी का इस्तेमाल करोड़ो की ठेकेदारी पाने में जमानत राशि के रूप में किया। उन्होंने कार्यपालक अभियंता राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर में 8 लाख 40 हजार, इसी विभाग के पूर्णिया प्रमंडल में 7 लाख 40 हजार व कार्यपालक अभियंता, पथ निर्माण विभाग, पथ प्रमंडल, डेहरी के कार्यालय में 8 लाख 40 हजार के फर्जी एनएससी जमा किए। जांच के क्रम में इन विभागों ने जमा किए गये एनएससी के नंबरों सहित पूरी जानकारी जांच एजेंसी को मुहैया करा दी है। राज्य के कई बड़े ठेकेदारों ने जहां लाखों रुपये मूल्य के चोरी के एनएससी और केवीपी का प्रयोग टेंडर हथियाने में किया, वहीं कई ठेकेदार महज 10 हजार रुपये मूल्य का एनएससी जमा कर फंस गये।

राजपुर बिहटा के मेसर्स कुमार कंस्ट्रक्शन के जय कुमार शर्मा, नार्थ एसकेपुरी निवासी ठेकेदार प्रेमचंद सिंह, अख्तियारपर विक्रम के सिद्धनाथ प्रसाद, लखीसराय के दिनेश कुमार सिंह, जक्कनपुर, पटना के कौशल किशोर, गायघाट के मेसर्स श्याम कंस्ट्रक्शन के रामेश्वर साव, आलम गंज के सत्येन्द्र नारायण सिंह, कटिहार के रमेश कुमार शर्मा, मेसर्स सारण कंस्ट्रक्शन के त्रिगुनानंद सिंह, सर्वेश्वरी कंस्ट्रक्शन के अवध प्रसाद सिंह वैसे ठेकेदार हैं जिन्होंने दस या बीस हजार रुपये मूल्य के एनएससी का ही प्रयोग किया है।

राज्य के जिन 41 ठेकेदारों ने चोरी के एनएससी या केवीपी का प्रयोग किया, उनमें बहुत सारे लोगों के पते सरकारी कार्यालयों में नहीं हैं। गौरतलब है कि एनएससी प्राप्त करने का एकमात्र स्थान डाकघर है। चोरी के एनएससी का प्रयोग करने वालों ने ऐसे एनएससी को सरकारी कार्यालयों में जमा करने के पूर्व उस पर जालसाजी भी की। चोरी के एनएससी पर डाकखाने की मुहर, डाकपाल का हस्ताक्षर, धारक का नाम, निर्गत की तिथि और यहां तक की उसकी परिपक्वता की तिथि भी अंकित कर दी।

आश्चर्य की बात तो यह है कि 2006 में जब तत्कालीन रेल डीआईजी अजय वर्मा ने इसकी जांच तेज की तब तक किसी ठेकेदार ने किसी डाकघर या उसके डाकपाल पर चोरी के एनएससी बेचने का आरोप लगाकर कांड अंकित नहीं कराया। बहरहाल अब जब सीबीआई ने इस मामले में अपनी जांच तेज कर दी है, तब ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है। पटना हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने राष्ट्रीय महत्व वाले इस मामले की जांच शुरू की है।

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