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यहां हैं ‘जब वी मेट’ के करीना-शाहिद

यहां हैं ‘जब वी मेट’ के करीना-शाहिद

शाम 6.30.. रोजाना की तरह शिवाजी ब्रिज पर सदर से पलवल लोकल ट्रेन के इंतजार में सीढ़ियों पर बैठे कई लड़के-लड़कियां। गाड़ी को आता देख लड़के-लड़कियां सीढ़ियों से कूदते-फांदते हैं। लड़कियां लेडीज डिब्बे में जगह पाने के लिए धक्का मार कर जगह बनाती हैं। जगह मिलते ही अपने ब्वॉय फ्रेंड को भी जगह दिलाने के लिए तिकड़म भिड़ाना शुरू।

पहले डिब्बे में चैक करना कि कोई लेडीज पुलिस तो नहीं है। महिला पुलिस को देखते ही लड़की इशारे से लड़के को आगाह कर देती है कि तुम अभी दूसरे डिब्बे में बैठ जाओ। लड़का इशारा पाते ही दूसरे डिब्बे में बैठ जाता। इधर ट्रेन भी चल पड़ती। डिब्बे में बैठते ही दोनों के बीच फोन का सिलसिला शुरू हो जाता, जो अगले स्टेशन पर ट्रेन रुकने तक चलता। अगला स्टेशन तिलक ब्रिज जैसे ही आता है महिला पुलिस दूसरे डिब्बे में चली जाती। मौके की तलाश में बैठा लड़का तुरंत अपना डिब्बा बदलकर लेडीज डिब्बे में बैठी प्रेमिका के पास आ जाता। लड़की किसी तरह से अपनी सहेलियों को कहकर कुछ जगह बनाती। फिर प्रेमी युगल बातों में मशगूल हो जाता। तभी ट्रेन निजामुद्दीन पर रुकी।

अचानक महिलाओं की भीड़ महिला डिब्बे को घेर लेती है। लड़की के साथ लड़के को बैठा देखकर अधेड़ उम्र महिलाएं बोलना शुरू कर देती हैं- भइया, ये लेडीज का डिब्बा है। तुम अपने डिब्बे में जाकर बैठो। इस बात को सुन लड़का तुरंत अपनी सीट खाली कर देता और दरवाजे की तरफ जाकर खड़ा हो जाता। अचानक पीछे से महिला पुलिस को देखकर लड़का डर जाता। महिला पुलिस के कुछ भी पूछने से पहले ही सफाई देने लगता- मैडम बहन साथ में थी इसलिए गलती से इस डिब्बे में चढ़ गया हूं।

लड़की भी लड़के को फंसता देखकर उसे बचाने के लिए कह उठती- भइया, अगले स्टेशन में डिब्बा बदल लेंगे। इतना सुन महिला पुलिस उसे दोबारा ऐसी गलती नहीं करने की हिदायत देकर अगले स्टेशन पर उतर जाती। लड़का चैन की सांस लेता। रोजाना की सवारियां इनकी इस आदत से वाकिफ होने के कारण हंस पड़ती हैं। कुछ यात्री कहते हैं- लगता है लड़की के साथ ही घर जाएगा।

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