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हमारे यहां दिए जान वाले अवार्ड की साख नहीं: हरफान

हमारे यहां दिए जान वाले अवार्ड की साख नहीं: हरफान

अभिनेता इरफान खान का मानना है कि देश में अभिनय के लिए दिये जाने वाले किसी राष्ट्रीय अवार्ड की अधिक साख नहीं है जबकि विदेशों में ऐसे पुरस्कारों से अभिनेताओं की कद्र बढ़ती है और उसके बाजार मूल्य में फर्क आता है।

अवार्ड की जोड़ तोड़ में अनावश्यक जूझने के बजाय उसकी जगह इरफान अभिनय की उन बारीकियों को उभारने में कहीं अधिक पुरस्कृत महसूस करते हैं जिसे दर्शक सालों याद रख सकें।

राजधानी दिल्ली में एक समारोह के मौके पर उन्होंने बताया, हमारे देश में जो अवार्ड दिये जाते हैं उनकी कोई खास साख नहीं है। फिर भी आपके काम को दर्शकों की जिस तरह की सराहना मिलती है और उस काम को अंजाम देने के लिए जितनी जी तोड़ मेहनत की जाती है अगर सरकार की ओर से ध्यान नहीं दिया जाता है तो यह आपके दिल को चुभता है। लेकिन बाद में आप इससे उबरते भी हैं।

उन्होंने कहा, अगर आप गोल्डन ग्लोब या आस्कर के लिए मनोनीत होते हैं तो अभिनेता की कद्र बढ़ जाती है और उसका बाजार मूल्य भी बदल जाता है। अवार्ड से ज्यादा अभिनेता के काम की साख कहीं अधिक मायने रखती है।

इरफान ने कहा कि वह शाहरुख खान जैसे सफल अभिनेताओं की तरह अपने काम में भव्यता परोसने के बजाय इस ओर ज्यादा ध्यान देते हैं कि आम दर्शक उस स्थिति या मनोभाव से खुद को जुड़ा हुआ महसूस करें, उसे छू सकें और अनुभूति कर सकें।

यह पूछने पर कि अभिनेता को आगे बढ़ने के लिए बालीवुड में क्या गाडफादर होना जरूरी है, इरफान ने कहा कि संघर्ष के लंबे दिनों में भी मेरे लिए अभिनय और उसे साफगोई से पेश करना मेरे लिए अहम था जिसके बल पर मैंने इस भारी संघर्ष वाले अभिनय के क्षेत्र में अपने लिए स्थान बनाया और आगे भी मेरे लिए काम ही महत्वपूर्ण रहेगा।

अपने काम के लिए अवार्ड मिलने की स्थिति के बारे में उन्होंने कहा कि मैं अपनी साख के दम पर ही अवार्ड प्राप्त करुंगा और लोगों को बताउंगा कि यह मेहनत के दम पर कमाया गया अवार्ड है।

उन्होंने कहा कि फिल्म साइन करने से पहले मैं सबसे पहले उसकी स्क्रिप्ट पर ध्यान देता हूं बाद में उसके निर्देशक की ओर ध्यान देता हूं और अंत में अपने पूरे काम पर ध्यान केन्द्रित करता हूं।

यह पूछने पर फिल्मों की रिलीज से पहले उसे चर्चा में लाने के लिए जिस तरह से कुछ नामी गिरामी हस्तियां उसे विवाद में लाती हैं क्या वह अपनी फिल्मों में ऐसा किये जाने के पक्षधर हैं, इरफान ने कहा, किसी भी परिस्थिति में ऐसा नहीं करूंगा।

उन्होंने भारतीय सिनेमा के मौजूदा दौर को बेहद दिलचस्प बताते हुए कहा कि फिल्म उद्योग हर सप्ताह बदल रहा है। इसमें नये निर्देशक सामने आये हैं जो नये जोखिमों को लेने में यकीन रखते हैं। सबसे बड़ी बात तो ये है कि दर्शक भी काफी दिलचस्प हो गये हैं जो पुराने धिसे पिटे फार्मुले के स्थान पर मनोरंजक, ताज और यथार्थपरक सिनेमा देखने में यकीन रखते हैं।

इरफान ने कहा कि अभिनेताओं और अभिनेत्रियों की भी नई खेप पहले के मुकाबले अधिक पेशेवराना रुख रखती हैं और काफी गंभीर और मेहनती हैं।

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