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सप्ताह के व्रत-त्योहार (30 से 5 सितम्बर)

30 अगस्त (रविवार) को श्री रामदेव जी का मेला (नवल दुर्ग)। सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में सायं 7 बजकर 24 मिनट से।
31 अगस्त (सोमवार) को पद्मा एकादशी व्रत। जल झूलनी एकादशी व्रत। दोल ग्यारस (म. प्र.)। हेक्राहिताम्बा (मणिपुर)।
पद्मा एकादशी व्रत : व्रती प्रात: स्नानादि करके भगवान वामन जी की मूर्ति बनवाएं और मत्स्य, कूर्म, वाराह आदि के नामोच्चरण सहित गन्ध-पुष्पादि सभी उपचारों से पूजन करें। दिन भर उपवास रखें और रात्रि में जगरण करके दूसरे दिन फिर इसका पूज करके द्रव्यादि ब्राह्मणों को देकर स्वयं भोजन करें। इस व्रत से सब प्रकार के अभीष्ट सिद्ध होते हैं।
1 सितम्बर (मंगलवार) को वामन द्वादशी व्रत। वामनावतार। वामन जयंती। श्रवण द्वादशी। प्रदोष व्रत। गो त्रिरात्र व्रत। दुग्ध व्रत। भौम प्रदोष व्रत। प्रथम ओणम दिवस (केरल)।
2 सितम्बर (बुधवार) को ओणम अथवा थिरू ओणम दिवस।
3 सितम्बर (बृहस्पतिवार) को पंचक प्रारंभ प्रात: 9 बजकर 35 मिनट से। अनन्त चतुदर्शी व्रत। कदली व्रत पूजन। रम्भारोपण। अनन्त पूज मध्याह्न में। तृतीया ओणम दिवस।
4 सितम्बर (शुक्रवार) को पंचक चालू हैं। स्नान-दान व्रतादि की भाद्रपदी पूíणमा। महालयारंभ। महेश्वर पूजन व्रत। पूर्णिमा श्राद्ध। चतुर्थ ओणम दिवस। नारायण गुरुदेव का जन्म दिवस।
5 सितम्बर (शनिवार) को पंचक हैं। इष्टि। आश्विन मास कृष्ण पक्षारम्भ। पितृपक्ष आरम्भ। प्रतिपदा श्राद्ध। आश्विन मासीय व्रत यम-नियमादि प्रारम्भ। आश्विन मास में दूध का त्याग करना चाहिए। सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन जयंती। शिक्षक दिवस।
पितृव्रत : पुत्र को चाहिए कि वह माता-पिता की मरण तिथि को मध्याह्न काल में पुन: स्नान करके श्रद्धादि करे और ब्राह्मणों को भोजन करा के स्वयं भोजन करे। भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से प्रारंभ करके आश्विन कृष्ण अमावस्या तक 16 दिन पितरों का तर्पण व श्राद्ध अवश्य करे।         
पं. वेणी माधव गोस्वामी

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