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सरकारी बस डिपो में ऊहापोह की स्थिति

बंटवार के बाद राज्य में सरकारी बस डिपो में उहापोह की स्थिति बनी हुई है। बसों से हो रही आमदनी को डिवीजन प्रबंधक के खाते में जमा कराया जा रहा है। बसों में आ रही मामूली खराबी को ठीक कराने, टायर-टयूब और बैटरी के अभाव में बसें खड़ी होती जा रही हैं। स्पष्ट दिशा निर्देश के अभाव और डिवीजन प्रबंधकों को खर्च करने का अधिकार नहीं मिलने से ऐसा हो रहा है। अभी बिहार के ही टिकट यात्रियों को उपलब्ध कराये जा रहे हैं। यह भी खत्म होनेवाला है। राज्य सरकार के फैसले तक बसें चलनी हैं। टिकट कहां से आयेगा, इसका भी आदेश नहीं मिला है। फरवरी का वेतन भी नहीं मिला है। मार्च के अंत में लगभग 10 कर्मचारी रिटायर होनेवाले हैं। सेवानिवृत्ति लाभ कैसे मिलेगा, इसको लेकर रिटायर होनेवाले कर्मचारी चिंतित हैं। वैसे सरकार कह चुकी है कि निगम का गठन नहीं होगा, ऐसे हालात में बसें भी नहीं चलेंगी। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया है एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन होगा, जो कर्मचारियों के समायोजन की संभावना तलाशेगी। कमेटी भी अब तक नहीं बनी है। यही कमेटी बसों और संपत्ति की उपयोगिता के बार में भी फैसला लेगी।

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