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एनसीआर बोर्ड की मद्द लेगा पावर कारपोरेशन

शहर को बिजली समस्या से निजात दिलाने के लिए पावर कारपोरेशन ने छह बिजलीघरों की क्षमता बढ़ाने की योजना तैयार की है। जमीन कारपोरेशन के पास मौजूद है। बस पैसा एनसीआर बोर्ड से लेकर इसका कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

आबादी बढ़ने के साथ ही शहर की बिजली की मांग में दिनों-दिन इजाफा हो रहा है। जिसे पूरा करने के लिए बिजलीघर न होने की वजह से कटौती की भरमार है। इससे निजात दिलाने के लिए एक ओर नए बिजलीघरों को बनाने पर जोर दिया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर मौजूदा बिजलीघरों की क्षमता बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। क्षमता बढ़ाने के लिए पावर कारपोरेशन द्वारा एनसीआर बोर्ड से पैसे के लिए इस्टीमेट तैयार किया जा रहा है।

कारपोरेशन के सूत्रों का कहना है कि जिन बिजलीघरों को अपग्रेड करना है। उनका सर्वे कर लिया गया है। जिसमें मुरादनगर-2 को 400 केवी, साहिबाबाद-2 को 220 केवी, मोरटी को 220 केवी, डीपीएच को 132 केवी, गोविंदपुरम को 132 केवी और राजेंद्र नगर को 132 केवी किए जाने की योजना है। इन सभी बिजलीघरों के पास पर्याप्त मात्रा में जमीन मौजूद है। अपग्रेडेशन के लिए पावर कारपोरेशन एनसीआर बोर्ड से पैसा लेगा।

इनको बनाने के लिए कितने पैसे की जरूरत पड़ेगी, इसका इस्टीमेट तैयार किया जा रहा है। एसई (ट्रांसमिशन) आर.पी.सिंह ने बताया कि इनके बनने से शहर की बिजली समस्या का अगले कई वर्षो तक समाधान हो जाएगा। सबसे ज्यादा परेशानी डीपीएच (डीजल पावर हाउस) की क्षमता कम होने की वजह से होती है। इसको सबसे पहले अपग्रेड किए जाने की योजना है। डीपीएच में जमीन भी काफी है। इसके अपग्रेड होने से मुख्य शहर में बिजली की समस्या समाप्त हो जाएगी।

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