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भाजपा में चल रही अंदरूनी जंग ठीक नहीं : पीएम

भाजपा में चल रही अंदरूनी जंग ठीक नहीं :  पीएम

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को कहा कि देश के मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में जो कुछ हो रहा है वह अच्छा नहीं है और उनका मानना है कि कंधार तथा पोखरण— द्वितीय को लेकर पैदा हुए विवाद गैरजरूरी हैं।

मनमोहन ने रामसर में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान भाजपा में मची खलबली पर अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस पार्टी में अंदरूनी जंग अच्छी बात नहीं है।

भाजपा में व्याप्त संकट के बारे में पूछे जाने पर प्रधानमंत्री ने कहा यह अच्छी बात नहीं है। लोकतंत्र में राजनीतिक दलों में स्थिरता होना जरूरी है। ऐसा नहीं होने से देश पर असर पड़ता है।

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) की परियोजनाओं पर प्रगति का जायजा लेने के लिये रामसर पहुंचे मनमोहन ने भाजपा में अस्थिरता होने के सवाल पर कहा कि सभी पार्टियों में स्थिरता होनी चाहिये।

कंधार विमान अपहरण कांड को लेकर विवाद पैदा होने के बारे में पूछे गए सवाल पर मनमोहन ने कहा मैं इस बारे में क्या कह सकता हूं। मैं वहां नहीं था। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच तल्खी से पैदा हुए माहौल के बारे में पूछे जाने पर प्रधानमंत्री ने कहा यह ठीक नहीं है।

खासकर यह पूछे जाने पर कि भाजपा नेता जोर देकर कह रहे हैं कि पार्टी नेता लालकृष्ण आडवाणी कैबिनेट की सुरक्षा समिति की उस बैठक में शामिल थे जिसमें जसवंत सिंह को अपहृत विमान के नागरिकों को छुड़ाने के लिये मुक्त किये गए तीन आतंकवादियों के साथ कंधार भेजने का फैसला लिया गया था, मनमोहन ने कहा मैं वहां नहीं था। वहां यशवंत और जसवंत थे।

पोखरण—द्वितीय परीक्षण को लेकर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व वैज्ञानिक के संथानम की टिप्पणी से पैदा हुए विवाद पर उन्होंने कहा कुछ वैज्ञानिक गलत धारणा पेश कर रहे हैं, जो गैरजरूरी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के तत्कालीन वैज्ञानिक सलाहकार एपीजे अब्दुल कलाम ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वर्ष 1998 में पोखरण में किये गए सभी परमाणु परीक्षण कामयाब रहे थे।

मनमोहन ने कहा इसलिये इसमें 'संथानम की दलील' कुछ भी नहीं है। इस मामले पर संदेह पैदा करने की कोई जरूरत नहीं है। हमें डॉक्टर कलाम, डॉक्टर चिदम्बरम और अन्य वैज्ञानिकों पर पूरा भरोसा है।

परीक्षण के दौरान डीआरडीओ के प्रतिनिधि के रूप में मौजूद रहे संथानम ने कहा था कि वर्ष 1998 में पोखरण में जिस ताप—नाभिकीय या हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया गया था वह कम असरदार था और उसमें देश के रणनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति की क्षमता नहीं थी। उन्होंने कहा था कि भारत को और परमाणु परीक्षण करने चाहिये और सीटीबीटी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करने चाहिये।

देश में कई स्थानों पर सूखे की स्थिति पर मनमोहन ने हालात को गम्भीर बताते हुए कहा इससे चीजों की कीमतों पर असर पड़ा है लेकिन देश में अनाज का पर्याप्त भंडार है और यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि गरीबी रेखा से नीचे गुजर—बसर करने वाले लोग प्रभावित न हों।

प्रधानमंत्री ने अपने दौरे पर क्षेत्र में नरेगा के तहत बनाए गए 60 में से 10 इस्तेमालशुदा कुओं का निरीक्षण किया। उन्होंने राजस्थान को सूखे से निपटने के लिये हर सम्भव मदद देने का वादा किया।
मनमोहन ने 12000 करोड़ रुपए का सूखा राहत पैकेज देने की राजस्थान की मांग के बारे में पूछने पर कहा दिल्ली लौटने पर मैं स्थिति की समीक्षा करूंगा। केन्द्र राज्य सरकार को हर सम्भव सहायता देगा।

बाड़मेर में तेल शोधन कारखाने की स्थापना की मांग पर उन्होंने कहा कि वह इस मामले पर विचार के लिये पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा से कहेंगे।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने बाड़मेर जिले में खारे पानी के मुद्दे पर वैज्ञानिकों के साथ बैठक की थी। देश की सीमा के पास की जमीन की अवैध रूप से बिक्री किये जाने की खबरों पर मनमोहन ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

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