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डैडी कूल

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सितारे : सुनील शेट्टी, आफताब शिवदासानी, आशीष चौधरी, आरती छाबड़िया, ट्यूलिप जोशी, जावेद जाफरी, किम शर्मा, सोफिया चौधरी, राजपाल यादव, चंकी पांडे, प्रेम चोपड़ा, सुहासिनी मुले, शरद सक्सेना और वृजेश हीरजी।
बैनर : मारुति इंटरनेशनल और बिग पिक्चर्स
निर्माता : इन्द्र कुमार, आशोक ठाकरिया
निर्देशक : के. मुरली मोहन राव
कथा-पटकथा : तुषार हीराचंदानी
संवाद : फरहाद, साजिद
गीत : आदित्य धर, प्रशांत इंगोरे, फरहाद, साजिद
संगीत : राघव सच्चर, फरहाद, साजिद

कहानी : स्टीवन लजारस (सुनील शेट्टी) अपने पिता डगरस लजारस (शरद सक्सेना) की अन्त्येष्टि पर स्पीच देना चाहता है, जबकि अन्य सभी लोग उसके भाई और नॉवेल लेखक ब्रायन (आशीष चौधरी) से स्पीच की उम्मीद किये हुए हैं। स्टीवन की पत्नी नैंसी (आरती छाबरिया) सास (सुहासिनी मुले) को नापसंद करती है और दूसरे घर में शिफ्ट होना चाहती है। वह प्रॉपर्टी डीलर पिंटो (विजय पाटकर) को बुला लेती है। माइकल (आफताब शिवदासानी) अपनी प्रेमिका मारिया (ट्यूलिप जोशी) के पिता से डरता है। इस कारण वह अन्त्येष्टि में जाना नहीं चाहता है। मारिया अपने भाई हैरी (चंकी पांडे) की एक दवा की शीशी में रखी ड्रग्स की गोली माइकल को खिला देती है, जिससे माइकल अजीबो-गरीब हरकतें करने लगता है। अन्त्येष्टि पर माइकल, जेनी (किम शर्मा), कालरेस (जावेद जाफरी), अंकल मर्फी (प्रेम चोपड़ा), जिम (वृजेश हीरजी) और मॉडल आयशा (सोफिया) की हरकतों से अजीब हालात पैदा हो जाते हैं। वहीं एंड्रयू (राजपाल यादव) के डगरस और उसके
प्रेम संबंध के खुलासे से नया तूफान खड़ा हो जाता है।

निर्देशन : के. मुरली मोहन राव ने इंग्लिश मूवी ‘डेथ एट ए फ्यूनरल’ का देसी वजर्न बनाया है। राव का निर्देशन कमजोर है। एक अच्छी कहानी, जिसमें हास्य की काफी गुंजाइश थी, को कमजोर स्क्रीन प्ले और कमजोर निर्देशन ने जाया कर दिया।

अभिनय : सुनील शेट्टी और आशीष ठीक रहे। राजपाल और वृजेश के पास करने को ज्यादा था नहीं। आफताब अजीबो-गरीब हरकतों से दर्शकों को हंसाने में कामयाब रहे हैं। किम, सोफिया और आरती औसत रहीं।

गीत-संगीत : फिल्म में राघव सच्चर का संगीत है, लेकिन मात्र एक ही ट्रैक सॉन्ग है।

क्या है खास : राजपाल का गे के रहस्य का खुलासा करने का सीन और आफताब की हरकतें।

क्या है बकवास : प्रेम चोपड़ा का गाली-गलौज करना, टॉयलेट में जावेद जफरी और प्रेम पर फिल्माया गया सीन, ड्रग्स का अलग-अलग असर।

पंचलाइन : अच्छी कहानी है, जिसमें हास्य की काफी गुंजाइश हो सकती थी, लेकिन देखने योग्य है।

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