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उत्तराखंड में नंदा महोत्सव की धूम

उत्तराखंड के नंदा देवी मंदिरों में इन दिनों नंदा महोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। अल्मोड़ा नगर में नन्दा देवी मंदिर समूह यहां सर्वाधिक प्रचलित धार्मिक स्थल माना जाता है जिसके प्रांगण तीन मंदिर विद्यमान हैं। इनमें से दो मंदिरों का निर्माण चन्द्रवंश राजवंश के उद्योत चन्द्र एवं दीपचन्द्र ने 17वीं शती ईस्वी में कराया था तथा तीसरे मंदिर का निर्माण ब्रिटिश शासनकाल में कुमाऊं के कमिश्नर ट्रेल द्वारा करवाया गया जिसमें नंदा देवी की मूर्तियां स्थापित की गईं। यह मंदिर सर्वतोभद्र एवं नागर शैली में निर्मित है तथा देवालय में बेदीबंद अन्तपरम एवं जंघा भाग में विभिन्न अलंकरणों का समावेश किया गया है। अन्य दोनों मंदिर वास्तु और स्थापत्य कला की दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण हैं।

अल्मोड़ा में भादों मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को नन्दा अष्टमी का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर कुमाऊं
 भर में ही नहीं गढ़वाल के नंदा देवी मंदिरों में भी मेलों का आयोजन किया जाता है। भादों मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी से शुरू होने वाले नंदा देवी मेले में कुमाऊं मण्डल की संस्कृति की पूरी झलक दिखलाई पड़ती है। पंचमी की रात से नंदा देवी मंदिर के परिसर के मुख्य द्वार पर स्थानीय जागरी द्वारा नन्दा देवी का यशोगान (जागर) के रूप में गाया जाता है।

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