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इंदिरापुरम बिजलीघर की जमीन के लिए जीडीए सक्रिय

कई वर्षो से फाइलों में कैद इंदिरापुरम बिजलीघर की जमीन के लिए जीडीए के पत्र ने इसको रफ्तार दे दी है। हरी झंडी मिलते ही पावर कारपोरेशन ने जमीन पैमाईश के लिए अधिकारियों की टीम बना दी है।

हॉट सिटी का हॉट इलाका इंदिरापुरम, बिजलीघर न बन पाने की वजह से ठंडा पड़ गया था। प्रापर्टी बूम के चलते इस क्षेत्र में कॉलोनियों की तो भरमार हो गई थी। लेकिन, बिजली के लिए कोई उपाय न होने की वजह से इन घरों में रहने वालों को बिजली नहीं मिल पा रही है। बीते पांच वर्षो से पूरे ट्रांस हिंडन क्षेत्र को निर्बाध बिजली सप्लाई मुहैया कराने के लिए इंदिरापुरम में बिजलीघर बनाया जाना था।

जिसको जीडीए देने को राजी नहीं हो रहा था। दो वर्ष पूर्व जीडीए ने एक जमीन देने पर रजामंदी जताई। जिसे देखने के लिए मौके पर पहुंचे पावर अधिकारी हैरान हो गए। यह जमीन हिंडन किनारे डूब क्षेत्र में  थी। जहां नदी का पानी खतरे के निशान से ऊपर जाते ही बिजलीघर डूब जाता। अब जीडीए ने कारपोरेशन को सीआईएसएफ कट के पास जमीन देने का पत्र दे दिया है। गत शनिवार को डिस्पैच किए गए पत्र पर पावर अधिकारियों ने तैयारियां शुरू कर दी है।

यहां पर कारपोरेशन को बारह एकड़ लगभग चालीस हजार स्क्वायर फीट जगह चाहिए। जिसकी पैमाईश के लिए कारपोरेशन और जीडीए की संयुक्त टीम मौके पर जाएगी। एसई (ट्रांसमिशन) आर.पी.सिंह ने बताया कि गैस आधारित तकनीक से बनने वाले इस चार सौ केवीए के लिए जमीन की काफी कम आवश्यक्ता पड़ती है। जबकि अमूमन बिजलीघर के लिए जीडीए को इससे चार गुना ज्यादा जमीन देनी पड़ती।

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  • Web Title:इंदिरापुरम बिजलीघर की जमीन के लिए जीडीए सक्रिय