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आर्थिक समृद्धि की राह बने आसान

सही समय पर उठाएं कदम
सबसे पहले तो निवेश और बचत का महत्व समझना चाहिए। बचत करना एक कला है। बचत और कंजूसी में फर्क होता है।बचत के जरिये अपने लिए बेहतर निवेश माध्यम से भविष्य संवारने की खातिर एफडी, स्टॉक मार्केट, म्यूचुअल फंड और प्रॉपर्टी में निवेश किया जा सकता है। जवानी में सिर्फ खाने-पीने और मौज-मस्ती पर ही खर्च नहीं करना चाहिए बल्कि बुढ़ापे के लिए कुछ हिस्सा, बेशक थोड़ा सा ही, निवेश भी करना चाहिए।
नियम, नियंत्रण और निरंतरता जरूरी
एक अंग्रेज दार्शनिक ने कहा भी है कि पैसा एक अच्छा सेवक हो सकता है, लेकिन मालिक बनते ही पैसा नियंत्रण से बाहरहोने लगता है। फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए सबसे जरूरी है बचत और निवेश के नियम बनाना। आपको पैसा कहां लगाना है, कहां खर्च करना है और फिजूलखर्च और इनवेस्टमेंट में क्या बारीक फर्क है, ये सब बातें जाननी जरूरी हैं। वित्तीय मजबूती पाने के लिए निरंतरता का होना बहुत जरूरी है।
कल की भी सोचें
बचत और निवेश करते समय आपको आने वाले कल की जरूरतों का भी एक मोटा-मोटा आइडिया लगा लेना चाहिए और उसी के मुताबिक अपने लक्ष्य तय करने चाहिए। इन्हीं के आधार पर अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग को आकार देना चाहिए। अपनी शादी, मकान, बच्चों की पढ़ाई उनके रोजगार और अपनी रिटायरेंट की प्लानिंग आज ही करने में किसी तरह की कोई शर्म की बात नहीं है। आज के फैसले कल को सुखी बना सकते हैं और आज की लापरवाही कल को कष्टकर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
बजट से खर्च पर लगाम
अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आपको बचत करनी होगी और अपने खर्चो को काबू में रखना होगा। ये खर्च नियमित भी हो सकते हैं और लोन वगैरह पर दी जाने वाली मासिक किस्त भी हो सकती है। इसके बाद सही निवेश का तरीका खोजना होगा जो आपकी टैक्स देनदारी और इनफ्लेशन की दर को पीछे छोड़ सके। घर के खर्च, बच्चों की फीस, अपना ट्रैवल बिल, इन सभी छोटे-बड़े खचर्चें को पूरी तरजीह दें और उसी के हिसाब से मासिक बजट बनाएं। इसमें मनोरंजन के लिए भी कुछ स्थान छोड़ें। एमरजेंसी फंड, मेडिकल खर्च और आकस्मिक खर्च के लिए हमेशा एक अलग फंड बना कर रखें। चाहें तो उसे छोटी अवधि की एफडी के रूप में रखा जा सकता है जिसे बार-बार रिन्यू कराते रहें।
लोन यानी भविष्य की कमाई में सेंध
लोन के राक्षस को आपकी कमाई का हिस्सा खाने से रोकना होगा। अगर लोन लेना जरूरी हो तो उसे किस हद तक काबू में रखा जाए यह भी देखना जरूरी होता है। होम लोन, एजुकेशन लोन टैक्स में फायदा देंगे तो क्रेडिट कार्ड का लोन आपका खून चूसता रहेगा। लोन लेते समय उसकी अवधि को अपनी मासिक आय के हिसाब से तय करें। यह आपकी मासिक आय के 40-45 फीसदी से ज्यादा न हो। होम लोन की लागत को कम करने के लिए जितना जल्दी हो सके, उसे चुकाने की व्यवस्था करें।
कार लोन लेने से पहले अपनी जेब को टटोल लें और जितना कम से कम हो उतना लोन लें। पर्सनल लोन लेते समय यह देख लें कि कहीं और किसी जरिये से लोन का जुगाड़ हो सकता है क्या? क्या आपकी एफडी, मकान या गोल्ड को गिरवी रखकर लोन मिल सकता है? इनसे मिलने वाला लोन पर्सनल लोन ले सस्ता ही होगा। क्रेडिट कार्ड से मिलने वाले लोन से तो तौबा ही भली। 40 से 50 प्रतिशत सालाना की दर पर मिलने वाले इस लोन से तो बचना ही बेहतर होगा। अगर किसी मजबूरी में इसे लेना भी पड़े तो इसका भुगतान समय पर करते रहें और जितना जल्दी हो सके इससे पीछा छुड़ा लें।

लोन के शिकंजे से कैसे छूटें
लोन के शिकंजे से निकलने के लिए सबसे पहले अपने गैर-जरूरी खर्चो में कटौती करें। बजट बनाकर फिक्स खर्च का सूची अलग बना लें और जो खर्च टाले जा सकते हैं, उनकी सूची अलग बना लें। इनमें कटौती की संभावनाओं का तलाश करें। ऐसा नहीं है कि कटौती के नाम पर कंजूसी करना शुरू कर दें।
मान लीजिए महीने में तीन फिल्म और चार बार खाना रेस्तरां में खाते हैं तो उसे कम किया जा सकता है। लोन की देनदारी की वरीयता को तय करें। महंगे लोन को सबसे पहले चुकाने की व्यवस्था करें। सबसे पहले क्रेडिट कार्ड फिर पर्सनल लोन उसके बाद ऑटो लोन और आखिर में होम लोन का नंबर लगाएं। हो सके तो लोन देने वाले से बातचीत कर मासिक किस्त को कम करवाया जा सकता है।
खुद पर करें विश्वास, ऑनलाइन हो जाएं
फाइनेंशियल प्लानिंग करते समय खुद पर भरोसा करना सीखें। नेट की दुनिया ने यह काम आसान बना दिया है। कोशिश करके देखें आपको हर चीज का जवाब नेट पर मिल जाएगा। ऑनलाइन बीमा पोर्टल, म्यूचुअल फंड, रियल एस्टेट, शेयर मार्केट ट्रेडिंग, आईपीओ सब कुछ यहां मौजूद है। खास बात यह है कि इनमें सर्विस बिल्कुल पारदर्शी होती है और जितनी जानकारी आप चाहते हैं, उससे ज्यादा मौजूद है। जो बातें आप नहीं जानते वह भी साफ-साफ बता दी जाती हैं। आप और आपके निवेश या बचत में बीच में से ब्रोकर और उसकी कमीशन भी गायब हो जाती है। यह ऑनलाइन तरीका आजकल काफी पसंद किया जा रहा है। ब्रोकर के भरोसे बैठने से बेहतर है खुद इस काम को अपनी सुविधा और अपने फायदे के हिसाब से करें।
बीमा सिर्फ सुरक्षा कवर के लिए हो
बीमा और निवेश को अलग रखना चाहिए। बीमा सुरक्षा के लिए टर्म प्लान लेना बेहतर होगा। यूलिप में ज्यादातर हिस्सा तो खर्च में ही निकल जाता है। उसमें सुरक्षा और निवेश का संतुलन बनाने में निवेशक की जेब हल्की पड़ जाती है। टर्म प्लान में लंबी अवधि चुनें जो आपकी लंबी आयु को कवर करे।
जोखिम को बेहतर तरीके से मैनेज करने के लिए अपने बीमा कवर को कई टुकड़ों में बांट कर बीमा कराएं। इनका प्रीमियम कम होता है। मनीबैक पॉलिसी और यूलिप से निवेश और सुरक्षा का फल पाने में घाटे का सौदा होता है। 

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