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वसीयत बचा सकती है टैक्स

केवल एक वसीयत से ही कई तरह के टैक्स के फायदे हासिल किए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए एक वसीयत के जरिये संपत्ति को ट्रांसफर करने के बाद एक अविभाजित हिन्दू परिवार की स्थापना कर एक पृथक इनकम टैक्स रिटर्न फाइल की जा सकती है। इसी तरह, अवयस्क बच्चों या अवयस्क पोतों के लिए वसीयत की जा सकती है जिससे सेक्शन 64 (1) के प्रावधान के अधीन इनकम की क्लबिंग न हो। वसीयत के द्वारा एसेट्स को कोई भी व्यक्ति अपनी पत्नी या अपनी पुत्रवधु को बिना किसी तरह का लेन-देन किए ट्रांसफर कर सकता है तथा इस पर सेक्शन 64 (1) के प्रावधान की क्लबिंग भी नहीं लागू होगी।
जहां पर कोई व्यक्ति अपनी मृत्यु के बाद टैरिटेबल ट्रस्ट का निर्माण करना चाहता हो या चैरिटी के उद्देश्य से जनहित में संपत्ति को ट्रांसफर करना चाहता हो तो वह ऐसा वसीयत के माध्यम से आसानी से कर सकता है। यहां पेश है वसीयत द्वारा टैक्स प्लानिंग के कुछ उदाहरण :
1. वसीयत द्वारा एचयूएफ तैयार कर टैक्स की बचत
वसीयत के द्वारा टैक्स प्लानिंग का एक महत्वपूर्ण जरिया है एक हिन्दू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) का गठन। इनकम टैक्स एक्ट-1961 के सेक्शन 64 (2) के प्रावधानों के अधीन जहां एक हिन्दू परिवार का कोई सदस्य एक संयुक्त परिवार की संपत्ति के साथ खुद हासिल की गई को दिखाता है तो उससे हासिल होने वाली इनकम उसकी अन्य इनकम के साथ क्लब कर दी जाएगी। इस घाटे वाली स्थिति से हिन्दू कानून के मिताक्षरा स्कूल द्वारा शासित एक हिन्दू की सहदायिकी के पक्ष में संपत्ति के ट्रांसफर के द्वारा उबरा जा सकता है ताकि एक पृथक अविभाजित हिन्दू परिवार (एचयूएफ) अस्तित्व में आ जाए जो इनकम टैक्स कानून के तहत एक स्वतंत्र और पृथक टैक्सेबल इकाई होगी।
उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि आप कोई संपत्ति अपने पुत्र, उसकी पत्नी तथा उसके बच्चों के नाम ट्रांसफर करना चाहते हैं। आप एक वसीयत बनाएं और संपत्ति अपने पुत्र के अविभाजित हिन्दू परिवार को ट्रांसफर कर दें और उसमें यह स्पष्ट रूप से लिख दें कि ट्रांसफर की गई संपत्ति केवक पुत्र के अविभाजित हिन्दू परिवार की होगी न कि किसी एकल सदस्य की। यह संपत्ति केवल तभी अविभाजित हिन्दू परिवार को वसीयत में मिलेगी और उसे एक पृथक टैक्स इकाई माना जाएगा। नई तैयार हुई एचयूएफ को इस समय लागू फाइनेंस एक्ट के अधीन किसी टैक्सपेयर को मिलने वाली पृथक छूट सीमा का लाभ मिलेगा।
2. वसीयत के द्वारा बच्चों या पोतों के लिए टैक्स प्लानिंग
सेक्शन 64 (1) के प्रावधान के अधीन यदि कोई व्यक्ति अपने अवयस्क बच्चों, अवयस्क पोतों को किसी तरह का उपहार देता है तो अवयस्क बच्चों या अवयस्क पोतों (शारीरिक रूप से विकलांग बच्चों को छोड़कर) को उससे होने वाली आय को, जैसी भी स्थिति हो, दाता की आय में क्लब किया जाएगा। बहरहाल, ऐसा तब नहीं होगा जब कोई व्यक्ति अपने अवयस्क बच्चों या अवयस्क पोतों को यह उपहार वसीयत में देता है।
कारण स्वाभाविक है, वसीयत लिखने वाले की मृत्यु के बाद अवयस्क बच्चे को दी गई एसेट्स अवयस्क बच्चे के लिए अलग फंड के रूप में रहेगी और उससे होने वाली आय अवयस्क के वयस्क होने पर उसकी अपनी आय में क्लब नहीं की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय (सीआईटी बनाम श्री दोषी, (1995) 211 एआईआर 1 (एससी)) के आधार पर अवयस्क के लिए एक ट्रस्ट में पैसा रखने से अवयस्क की आय को क्लब किए जाने से बचाया जा सकता है। इससे वसीयत को टैक्स बचाने के लिए उनके नाम संपत्ति को ट्रांसफर किया जा सकता है।
3. वसीयत द्वारा अपनी पत्नी को फंड्स ट्रांसफर द्वारा टैक्स प्लानिंग
सेक्शन 64 (1) के प्रावधानों के अधीन यदि कोई टैक्सपेयर अपने जीवनकाल में अपनी पत्नी को कोई उपहार देता है तो उसे देने वाले की आय में जोड़ा जाता है। बहरहाल, यदि वसीयत के द्वारा अपनी पत्नी को यह उपहार दिया जाए तो यहां इनकम की क्लबिंग का कोई प्रश्न नहीं उठता। इससे काफी टैक्स बचाया जा सकता है। इस माध्यम से एस्टेट डय़ूटी खत्म होने के साथ ही साथ वसीयत द्वारा संपत्ति के ट्रांसफर के अन्य तरीकों को अपनाना काफी फायदेमंद हो सकता है।
4. वसीयत द्वारा पुत्रवधु को संपत्ति ट्रांसफर द्वारा टैक्स प्लानिंग
इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 64 (1) (6) तथा (8) के प्रावधानों के अधीन पुत्रवधु के पक्ष में संपत्ति का ट्रांसफर सीधे या ट्रस्ट के ट्रस्टी के रूप में उसके लाभ के लिए किया जाता है तो ट्रांसफर की गई एसेट से होने वाली आय देने वाले की आय के साथ जोड़ी जाएगी। बहरहाल, इस मुश्किल को वसीयत द्वारा दूर किया जा सकता है। इससे पुत्रवधू के पक्ष में वसीयत की जा सकती है जिसमें उसे पूर्ण अधिकार दे दिया जाए और वसीयत करने वाले की मृत्यु के बाद एक टैक्सेबल इकाई हो जाएगी, यदि वह पहले से न हो। वसीयत करने वाले की मृत्यु के बाद मृतक व्यक्ति की संपत्ति के साथ वसीयत करने वाले इनकम के साथ पुत्रवधु की आय की कोई क्लबिंग नहीं की जाएगी।
वसीयत द्वारा एक विवेकाधीन ट्रस्ट भी बनाई जा सकती है जिस पर सामान्य दर पर टैक्स लगेगा। इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 164 (1) के पहले प्रावधान के क्लॉज (2) में लिखा है कि यदि वसीयत द्वारा केवल एक ट्रस्ट घोषित की गई है तोउस ट्रस्ट की आय इनकम टैक्स के योग्य होगी जैसे एक वैयक्तिक की कुल आय होती है। यह सुनिश्चित करें कि वसीयत द्वारा केवल एक ही ऐसी ट्रस्ट बनाई जाए।

 

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