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कंपनियों से पूछें

दिन-ब-दिन इंश्योरेंस पॉलिसी कांपलेक्स होती जा रही है। ऐसे में किसी नए व्यक्ति के लिए यह मुश्किल काम होता है कि वह इस बात का पता लगा सकें कि उसकी पॉलिसी में क्या कवर है और क्या नहीं। आप कंपनी से पूरी तफ्तीश करें कि आपको क्लेम क्यों नहीं दिया गया।
होता क्या है : उदाहरण के तौर पर कोई बीमार व्यक्ति, इंश्योरेंस कंपनी से यह शिकायत करता है कि उसके बिल को मेडिक्लेम पॉलिसी के अंदर क्लेम नहीं किया गया। इसके लिए इंश्योरेंस एजेंट भी कम दोषी नहीं होते क्योंकि आपकी पॉलिसी में कौन सी चीजें शुमार नहीं हैं, उन्होंने इसके बारे में आपको जानकारी नहीं दी। ऐसे में रोगी को यह पूछने का अधिकार है कि आखिर उसे क्लेम क्यों नहीं दिया गया। कंपनी को जानकारी देनी होगी कि क्लेम उसने क्यों नहीं दिया। संभव है आपकी पॉलिसी, आपके द्वारा किए गए क्लेम को कवर न करती हो। मतलब यदि प्राइवेट हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में कहा जाता है कि गंभीर रूप से जलने पर क्लेम अदा किया जाएगा लेकिन कितने प्रतिशत जलने को गंभीर माना जाएगा, इसकी जानकारी नहीं होती।
गौर करें
ल्ल अपने पॉलिसी डाक्युमेंट चेक कर लें और यह देखें कि आपको क्लेम न देने का जो कारण बताया गया है, वह सही हैं या नहीं।
ल्ल आप क्लेम के बारे में जानकारी इंश्योरेंस कंपनी की हेल्पलाइन और कस्टमर केयर सर्विस से प्राप्त कर सकते हैं।
ल्ल क्लेम के कारण के बारे में आप लिखित जानकारी मांग सकते हैं।

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