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प्लॉट का नौ साल से इंतजार, अब आन्दोलन की तैयारी

अथॉरिटी ने पांच गांवों के किसानों की हजारों एकड़ जमीन को नौ साल पहले अधिग्रहण कर लिया था। अधिग्रहित जमीन को बेचकर करोड़ों रुपये भी कमा लिए। इसके बदले में किसानों को मिलने वाले छह प्रतिशत स्कीम के प्लॉट अभी तक नहीं मिले हैं। किसान पिछले नौ वर्षो से प्लॉट पाने के लिए अथॉरिटी के चक्कर लगाते थक चुके हैं। प्लॉट न मिलने से परेशान किसान अब हार थक कर आन्दोलन की तैयारी में लगे हैं।

किसानों ने बताया कि क्षेत्र के गांव बिरोडी चक्रसेनपुर, तुस्याना, घरबरा, मुरशदपुर, कासना के अलावा कई गांवों की जमीन कई साल पहले अथॉरिटी ने विभिन्न योजनाओं के लिए अधिग्रहित की थी। कई गांव ऐसे हैं, जिनकी जमीन को अधिग्रहण हुए नौ साल हो गए हैं, इसके बाद भी किसानों को अधिग्रहित जमीन के बदले मिलने वाले छह प्रतिशत प्लॉट आज तक नहीं मिल पाए हैं।

किसानों का आरोप है कि उनके आबादी के प्लॉटों से संबंधित फाइलों को प्लानिंग विभाग के अफसर दबाए बैठे हैं, जो कि बगैर मुट्ठी गर्म किए प्लॉट की फाइलों को आगे नहीं बढ़ाते हैं। किसान बले सिंह का कहना है कि प्लानिंग विभाग के अफसर प्लाटों के नंबर भी नहीं लगा रहे हैं। ऐसे करीब बारह सौ किसान हैं जो आबादी के प्लाटों के लिए भटकते फिर रहे हैं। किसान अभय सिंह ने बताया कि अथॉरिटी का ग्राम विकास विभाग भी इस ओर से आंखें बंद किए बैठा है।

अथॉरिटी के एसीईओ सुधीर कुमार सिंह का कहना हैं कि सीईओ के निर्देश पर पांच गांवों के करीब बारह सौ किसानों को आबादी के छह प्रतिशत प्लाटों का आवंटन शीघ्र शुरू करा दिया जाएगा। किसानों के प्लाटों के नंबर लगाने के लिए प्लानिंग विभाग को कहा गया है। उन्होंने कहा कि किसान आबादी के मिलने वाले प्लॉट को तीन साल तक बेचने पर पाबंदी लगा दी गई हैं। जो किसान इस दौरान अपना प्लॉट बेच देगा तो वह स्कीम में फार्म जमा नहीं कर सकेगा।

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