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बिना चीनी त्योहारों से मिठास गायब होने की आशंका

त्योहारों का सीजन है, देश में चीनी केवल दो महीने की ही शेष बची है। केंद्र सरकार इसका हाल ही में खुलासा कर चुकी है। ऐसे में चीनी कहीं दाल से अधिक महंगी हो जाए? यह सोचकर आम आदमी परेशान होने लगा है। राशन डिपो से गायब चीनी को देख गरीबों की चिंताएं और भी बढ़ गई हैं। बीपीएल को राशन पर दी जाने वाली चीनी चार महीने से नहीं मिली। स्थिति यही रही तो त्योहार पर लोगों के यहां बिना चीनी मिठास गायब हो सकती है।

जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के पास भी इसका कोई पुख्ता जवाब नहीं। हरियाणा में 13 चीनी मिल हैं। रोहतक, पानीपत व यमुनानगर की मिल सबसे पुरानी हैं। जबकि पलवल जिला की बामनी खेड़ा शूगर मिल का निर्माण वर्ष 84-85 में किया गया। उस समय यह लैटेस्ट टेक्नोलोजी की शूगर मिल थी। पिछले तीन वर्षो में हरियाणा ही नहीं, अपितु देश के विभिन्न हिस्सो में गन्ने के उत्पादन में काफी गिरावट आई।

वर्ष 2008 तक इस शूगर मील से उत्पादन काफी अच्छा हुआ। इस वर्ष गन्ने के उत्पादन में और भी कमी आ गई। इसके चलते इस सीजन में बामनी खेड़ा शूगर मील के मुश्किल से दो महीने चलने के आसार है। एक ओर देश की जनता की नजर शूगर मील से होने वाले चीनी के उत्पादन पर टिकी है। दूसरी ओर शूगर मील प्रबंधक इस बार घटते चीनी के उत्पादन को लेकर चिंतित हैं। नवंबर के अंत तक शूगर मील से चीनी का उत्पादन शुरू होगा।

कैन मैनेजर केएस ढाका ने बताया कि तकनीकी तौर पर शूगर मिल बिल्कुल फिट है। गन्ना उत्पादन गिरने के कारण ही चीनी का उत्पादन गिरा है।

 

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