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वृद्धि दर छह फीसदी से अधिक होगी: प्रणव

वृद्धि दर छह फीसदी से अधिक होगी: प्रणव

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने शुक्रवार को उम्मीद जताई कि चालू वित्त वर्ष के दौरान छह फीसद से अधिक की वृद्धि दर दर्ज करना संभव है और कहा कि वित्तीय क्षेत्र में सुधार और विनिवेश में सुधार को आगे बढ़ाने के संबंध में परेशान होने की कोई गुंजाइश नहीं है।

प्रणव ने एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के सदस्यों के साथ बातचीत में कहा कि पिछले पांच साल में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर आठ फीसदी रही है 2008-09 में यह 6.7 फीसदी थी। इस साल सूखे की वजह से यह मुश्किल होगी। यदि कोई बड़ी मुश्किल पेश नहीं आई तो 2009-10 में छह फीसद से अधिक की वृद्धि दर हासिल करना संभव होगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले साल विशेष तौर पर दूसरी छमाही में पेट्रोलियम उत्पादों की ऊंची कीमत, मुद्रास्फीति की ऊंची दर और वैश्विक वित्तीय संकट के कारण समय मुश्लिक भरा रहा। मुखर्जी ने कहा कि वृद्धि दर में गिरावट को रोकने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा दो पैकेज की घोषणा की गई और उसके अलावा भी कुछ उपाय घोषित किए गए।

सूखा और अन्य समस्याओं को जिक्र करने के बाद प्रणव ने कहा कि चिंता की एक और वजह यह है कि लोग सुधार एजेंडे के बारे में टिप्पणी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुधार निरंतर प्रक्रिया है। यह सही दिशा में चल रही है। वित्तीय क्षेत्र के सुधार के बारे में पेरशान होने की कोई गुंजाईश नहीं है।

विनिवेश के बारे में मुखर्जी ने कहा कि वह आंकड़े नहीं देंगे लेकिन इस मामले में विभिन्न मंत्रालयों और विनिवेश विभाग के बारे में परामर्श हो रहा है। विनिवेश के बारे में दो प्रमुख फैसले लिए जा चुके हैं। एनएचपीसी पूंजी बाजार में प्रवेश कर चुकी है और आयल इंडिया अगले महीने अपना आईपीओ लाएगी।

मुखर्जी ने यह स्वीकार किया कि राजकोषीय स्थिति को ठीक करने का कार्यक्रम इस साल बुरी तरह प्रभावित हुआ है क्योंकि राजकोषीय और राजस्व घाटा क्रमश: छह और आठ फीसदी के उच्च स्तर पर था। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि 2011 तक ये आंकड़े पांच फीसदी पर आ जाएं। उन्होंने कहा कि राजकोषीय घाटा अधिक रहने से समस्या होगी। जितनी जल्दी हम इसे अपेक्षाकृत निम्न स्तर पर ले आएं उतना ही अच्छा रहेगा।

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