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भारत-चीन को जलवायु परिवर्तन समाधान में भागीदार बनना होगाः अमेरिका

भारत-चीन को जलवायु परिवर्तन समाधान में भागीदार बनना होगाः अमेरिका

जलवायु परिवर्तन की समस्या के समाधान में भारत और चीन की भागीदारी की जरूरत पर बल देते हुए अमेरिका ने कहा है कि एशिया की दोनों बड़ी शक्तियां दिसंबर में कोपनहेगेन में प्रस्तावित जलवायु परिवर्तन पर शिखर सम्मेलन की सफलता में उल्लेखनीय योगदान कर सकती हैं।

विदेश मंत्रालय में सार्वजनिक मामलों के उप मंत्री पीजे क्रोले ने विदेश मंत्रालय में गुरुवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा, कोपनहेगेन शिखर वार्ता के संबंध में हम भारत और चीन से उल्लेखनीय योगदान चाहते हैं।

क्रोले ने कहा, ग्रीन हाउस गैसों के उत्सजर्न से निपटने में हम यदि प्रगति करना चाहते हैं तो उन्हें समाधान का हिस्सा बनना होगा।

भारत के पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश द्वारा एक भारतीय दैनिक को दिये गये साक्षात्कार के संबंध में पूछे गये प्रश्न का क्रोले जवाब दे रहे थे। रमेश ने कहा था कि पश्चिमी देशों के दबाव का सामना करने के लिए जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत और चीन साथ मिलकर काम करने को सहमत हो गये हैं।

क्रोले ने कहा कि इससे पहले भारत और चीन की यात्रा के दौरान विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने जलवायु परिवर्तन के महत्वपूर्ण मुद्दे पर दोनों देशों से बातचीत की थी।

उन्होंने कहा, उन्हें इस प्रक्रिया में शामिल होना होगा। कोपनहेगेन में जब सम्मेलन होगा उन्हें अपनी अर्थपूर्ण स्थिति साबित करनी होगी और हम उनसे बातचीत जारी रखेंगे।

क्रोले ने कहा कि अमेरिका में इस मुद्दे पर ठोस सहमति बनाने के लिए गत कुछ महीनों में ओबामा प्रशासन ने बहुत मेहनत की है।

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