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गैस विवाद मामले में सरकार बने वादीः एडीएजी

गैस विवाद मामले में सरकार बने वादीः एडीएजी

अनिल अंबानी समूह ने तेल मंत्रालय से रिलायंस गैस विवाद में सबके साथ एक समान नीति का पालन करने की अपील करते हुए गुरुवार को कहा कि वह मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी आरआईएल के खिलाफ सरकारी बिजली कंपनी एनटीपीसी द्वारा बंबई उच्च न्यायालय में चल रहे मुकदमें वादी बने।

अनिल खेमे का कहना है कि सरकार को यह कदम उठा कर एक निजी कंपनी के फायदे के लिए बिजली उपभोक्ताओं को अतिरिक्त 30000 करोड़ रुपए का भुगतान करने से बचाना चाहिए। एडीएजी ने मंत्रालय को लिखे एक पत्र में कहा कि आरआईएल-एनटीपीसी मामले में तटस्थ रहने के उलट पेट्रोलियम मंत्रालय ने इसी तरह की दो कंपनियों (आरआईएल और अनिल अंबानी समूह की कंपनी आरएनआरएल) के बीच गैस आपूर्ति के संबंध में चल रहे व्यावसायिक विवाद में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करने का विकल्प चुना जबकि बंबई उच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक सरकार का हित पूरी तरह से सुरक्षित है।

एडीएजी के अध्यक्ष ए एन सेतुरमन ने अपने पत्र में मीडिया रपटों का हवाला देते हुए कहा कि एनटीपीसी के खिलाफ मामले में अपनीपेशबंदी मजबूत करने के लिए आरआईएल तेल मंत्रालय द्वारा आरआईएल-आरएनआरएल मामले में दिए जाने वाले हलफनामे का इस्तेमाल कर रही है।

एनटीपीसी बंबई उच्च न्यायालय में आरआईएल से 2.34 डालर प्रति एमएमबीटीयू की दर से गैस लेने के संबध में मुकदमा लड़ रही है।2004 की निविदा में उक्त मूल्य पर गैस की आपूर्ति के प्रति प्रतिबद्धता जताई गई थी। हालांकि आरआईएल ने कहा कि इस मूल्य के लिए सरकार की मंजूरी आवश्यक है।

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